ईरान पर अमेरिकी हमले तेज, लगातार आठवीं रात एयरस्ट्राइक, ट्रम्प बोले- सैनिकों की मौत का लिया जा रहा बदला
- Shiv Kumar
- 19 Jul, 2026
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार आठवीं रात भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों को उन्होंने स्वयं मंजूरी दी थी और यह कार्रवाई जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के जवाब में की गई। वहीं, ईरान ने भी अमेरिका के साथ हुए समझौते से पीछे हटने का ऐलान कर दिया है। दोनों देशों की लगातार सैन्य कार्रवाई से पूरे मध्य-पूर्व में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, होर्मुज पर फोकस
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ताजा एयरस्ट्राइक में ईरान के सैन्य ठिकानों, हथियारों के भंडार और लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में पुलों और डिसैलिनेशन प्लांट पर हमलों का भी दावा किया गया है, लेकिन CENTCOM ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जॉर्डन में हालिया हमले के बाद इस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है।
ईरान ने समझौता तोड़ा, हमलों में 50 मौतों का दावा
ईरान ने अमेरिका के साथ एक महीने पहले हुए समझौते से हटने की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले समझौते का उल्लंघन किया। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि 27 जून से 18 जुलाई के बीच अमेरिकी हमलों में 50 लोगों की मौत और 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। वहीं, ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले का दावा भी किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी, बढ़ी वैश्विक चिंता
संघर्ष का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर भी दिखाई देने लगा है। शिप ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार, यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिका ने दुनियाभर में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव कहीं बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में न बदल जाए।
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