अमेरिका ने ईरान पर सबसे बड़े सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया, मिडिल ईस्ट में बढ़ते खतरे के बीच लिया फैसला

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अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर बड़े सैन्य हमले रोक दिए हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, हथियारों के घटते भंडार, हूती हमलों, ईरान-इजराइल विवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं।

वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलहाल ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को रोकने का फैसला किया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ हुई बैठक के बाद ट्रम्प ने सेना को नए बड़े हमले रोकने का निर्देश दिया। बताया गया कि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अभियान लंबा खिंचने पर पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य एयर डिफेंस हथियारों का भंडार तेजी से घट सकता है, जिससे क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।


सैन्य संसाधनों पर बढ़ा दबाव, हमले फिलहाल रोके गए

रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सलाह दी कि बड़े सैन्य अभियान से अमेरिकी बलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। बताया गया कि अप्रैल के अंत तक अमेरिका 1200 से अधिक पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुका था। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सेना जरूरत पड़ने पर किसी भी बड़े अभियान के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी। दूसरी ओर, लगातार 13 रातों तक हुए हमलों के बाद शुक्रवार रात पहली बार अमेरिका ने ईरान पर कोई हवाई हमला नहीं किया।


ईरान-हूती की गतिविधियों से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता

इस बीच हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के जजान स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। वहीं ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे चार जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की गई, जिसके बाद जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया। ईरान सरकार घरेलू खपत नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी पर भी विचार कर रही है। बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के नौसैनिक अड्डे पर ड्रोन और मिसाइल हमले का भी दावा किया गया है।


कुवैत का इनकार, ईरान-इजराइल के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

कुवैत ने उन रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में सहयोग किया। कुवैत सरकार ने कहा कि उसने न तो किसी अभियान में हिस्सा लिया और न ही अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या समुद्री सीमा का इस्तेमाल होने दिया। दूसरी ओर, ईरान ने सरकारी टीवी IRIB पर राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के भाषण के हिस्से को प्रसारित न करने का आरोप लगाते हुए सेंसरशिप का मुद्दा उठाया। वहीं IRGC ने इजराइल पर अमेरिका को ईरान के खिलाफ भड़काने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि यदि दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।


यूक्रेन विवाद और बढ़ी अमेरिकी चिंता

ईरान ने कैस्पियन सागर में अपने व्यापारिक जहाज पर कथित हमले के विरोध में यूक्रेन के राजनयिक को तलब किया है। ईरान का आरोप है कि इस हमले में एक नाविक की मौत हुई और एक अन्य घायल हुआ। दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि उनकी सेना ने उन जहाजों को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल ईरान से जुड़े सैन्य सामान की ढुलाई में हो रहा था। इसी बीच जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका की चिंता और बढ़ गई है। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिक, सहयोगी देश और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने ईरानी जवाबी हमलों के अधिक खतरे में आ सकते हैं।

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