मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, अमेरिका-सऊदी के एयरस्ट्राइक के बाद ईरान का बैलिस्टिक मिसाइलों से पलटवार
- Shiv Kumar
- 29 Jul, 2026
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के कई ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन ठिकानों से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। दूसरी ओर, इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) ने कहा है कि इन हमलों में उसके 8 लड़ाके मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये मिसाइलें जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर छोड़ी गई थीं, लेकिन सभी को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में भी बढ़ा तनाव
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों को रोक लिया है। वहीं, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर बैलिस्टिक मिसाइल दागने की जिम्मेदारी ली है। इसके अलावा, हूतियों ने सऊदी अरब का एक टोही ड्रोन मार गिराने का भी दावा किया है। सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत के तेल प्रतिष्ठानों की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की है। लगातार बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण मिडिल ईस्ट के समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ट्रम्प-नेतन्याहू की बैठक में ईरान पर बनी रणनीति
व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई बैठक में ईरान को लेकर अहम चर्चा हुई। बैठक के बाद नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों की स्पष्ट सहमति है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रम्प से मुलाकात कर पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, रक्षा सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
भारत ने जताई चिंता, UNSC में उठाया मुद्दा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कारोबारी जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। भारत ने बताया कि हालिया हमलों में कई भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। कुछ भारतीय घायल हुए, जबकि एक भारतीय की मौत और एक अन्य के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है।
इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया क्यों हैं अहम
इराक में सक्रिय पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF), कताइब हिज्बुल्लाह और हरकत हिज्बुल्लाह अल-नुजाबा जैसे संगठन ईरान समर्थित प्रमुख मिलिशिया माने जाते हैं। 2014 में ISIS के खिलाफ लड़ाई के दौरान PMF का गठन हुआ था और बाद में इसे इराक की आधिकारिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बना दिया गया। इन संगठनों का प्रभाव केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इराक की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर भी इनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। अमेरिका लंबे समय से इन गुटों पर अपने सैनिकों और सैन्य ठिकानों पर हमलों का आरोप लगाता रहा है, जिसके चलते समय-समय पर इनके ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की जाती रही है।
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