Traffic Light की कहानी, कैसे आए लाल, पीले और हरे रंग, क्या है इनके पीछे की वजह

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आज पूरी दुनिया में ट्रैफिक सिग्नल पर लाल, पीली और हरी बत्ती का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसके पीछे विज्ञान, इतिहास और मनोविज्ञान की दिलचस्प कहानी छिपी है।

आज ट्रैफिक सिग्नल के बिना किसी भी शहर की कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन इसकी शुरुआत करीब 158 साल पहले हुई थी। दुनिया का पहला ट्रैफिक सिग्नल 10 दिसंबर 1868 को इंग्लैंड की राजधानी लंदन में संसद भवन के पास लगाया गया था। इसे ब्रिटिश रेलवे इंजीनियर जे. पी. नाइट (J. P. Knight) ने डिजाइन किया था। उस समय यह गैस से चलता था और इसमें केवल लाल और हरे रंग की लाइट होती थी, जिसे एक पुलिसकर्मी हाथ से नियंत्रित करता था।

पीली बत्ती कब और क्यों जोड़ी गई?

शुरुआती ट्रैफिक सिग्नल में केवल लाल और हरी बत्ती थी, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि अचानक रुकने और चलने के बीच एक चेतावनी संकेत होना चाहिए। इसके बाद 1920 में डेट्रॉइट (अमेरिका) के पुलिस अधिकारी विलियम पॉट्स (William Potts) ने पहली बार लाल, पीली और हरी तीन रंगों वाला आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल तैयार किया। इसके बाद यही सिस्टम पूरी दुनिया में अपनाया गया।
शुरुआत में ट्रैफिक सिग्नल गैस से चलते थे, लेकिन एक बार गैस विस्फोट में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। इसके बाद इस तकनीक में बदलाव किए गए और आगे चलकर इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल विकसित हुए।

आखिर लाल, पीला और हरा ही क्यों चुना गया?

इन तीन रंगों के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। लाल रंग की वेवलेंथ सबसे अधिक होती है, इसलिए यह सबसे दूर से दिखाई देता है और खतरे या रुकने का संकेत देने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया। हरा रंग सुरक्षा, प्रकृति और आगे बढ़ने का प्रतीक है, इसलिए इसे 'गो' के संकेत के रूप में चुना गया। वहीं पीला रंग चेतावनी और तैयारी का संकेत देता है, जिससे चालक रुकने या चलने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सके। यही कारण है कि आज भी दुनिया के लगभग सभी देशों में यही तीन रंग मानक बने हुए हैं।

ट्रैफिक लाइट सिर्फ नियम नहीं, जिंदगी का संदेश भी देती है

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रैफिक सिग्नल केवल सड़क पर व्यवस्था बनाए रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन के लिए भी एक प्रतीक है। लाल हमें रुककर सोचने की सीख देता है, पीला हर बदलाव के लिए तैयार रहने का संदेश देता है और हरा आगे बढ़ने, नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि ट्रैफिक लाइट आज सिर्फ सड़क सुरक्षा का नहीं, बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी का भी वैश्विक प्रतीक बन चुकी है।

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