नेपाल में प्याज के दाम ने मचाई महंगाई, 140% महंगा! भारत की आपूर्ति और बारिश से बढ़ा दबाव
- Babli Ansari
- 01 Sep, 2026
नई दिल्ली। नेपाल में प्याज की कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर जोरदार चोट की है। थोक बाजार में दाम एक साल में 140 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और खुदरा बाजार में प्याज कई इलाकों में 110 से 140 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। कालीमाटी फल-सब्जी बाजार विकास बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ एक हफ्ते में थोक भाव 20.77 प्रतिशत, एक महीने में 68.65 प्रतिशत और साल भर में 140 प्रतिशत चढ़ा है। इसका सबसे बड़ा असर काठमांडू से लेकर सीमा से जुड़े इलाकों तक दिख रहा है, जहां रोजमर्रा की रसोई का बजट अचानक बिगड़ गया है।
भारत से आवक घटी, बाजार में तंगी बढ़ी
सूत्रों के अनुसार इस तेज उछाल के पीछे भारत से होने वाली आपूर्ति में कमी सबसे बड़ा कारण है। नेपाल अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा भारतीय बाजार से पूरा करता है, लेकिन हाल के दिनों में आपूर्ति कमजोर पड़ने के साथ मुख्य ढांचागत रास्तों में दिक्कतें भी सामने आई हैं। यही वजह है कि थोक बाजार में दाम लगातार ऊपर खिसकते चले गए। रविवार को कालीमाटी थोक बाजार में प्याज 93.6 रुपये प्रति किलो के आसपास बिकता देखा गया। खुदरा बाजार में यह कीमत और ऊपर जाकर 110 से 140 रुपये तक पहुंच गई। सीमा पार व्यापार पर निर्भर नेपाली बाजार में यह झटका इसलिए भी भारी है क्योंकि प्याज वहां रोजमर्रा की सबसे जरूरी सब्जियों में गिना जाता है और दाम बढ़ते ही असर सीधे घर के खर्च पर पड़ता है।
भारत में भी महंगा प्याज, सरकार को उतरना पड़ा मैदान में
यह संकट सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है। भारत में भी प्याज की खुदरा कीमतें चढ़ी हैं और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में रेट करीब 65 रुपये किलो तक पहुंचने की खबरें हैं, जबकि एक साल पहले यह लगभग 35 रुपये किलो के आसपास था। हालात संभालने के लिए केंद्र सरकार ने 35 रुपये किलो की दर पर प्याज बिक्री का दायरा 19 शहरों तक बढ़ा दिया है। दिल्ली को 1,000 मीट्रिक टन प्याज उपलब्ध कराने की तैयारी भी की गई है। दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में भी प्याज और लहसुन के दाम ऊंचे बने रहने की बात कही गई है। साफ है कि मौसम की मार, फसल नुकसान और सप्लाई में खिंचाव ने दोनों देशों में एक साथ दबाव बनाया है।
महंगाई का असर और आगे की तस्वीर
नेपाल में महंगाई पहले ही ऊपर जा रही थी और अब प्याज की तेजी ने हालात और मुश्किल कर दिए हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक के मुताबिक मिड-जुलाई 2026 में उपभोक्ता मुद्रास्फीति 5.14 प्रतिशत रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 3.08 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से वहां पहले से दबाव में चल रही घरेलू अर्थव्यवस्था पर नया बोझ आ गया है। जानकार मानते हैं कि जब तक भारत में नई आवक बेहतर नहीं होती और सप्लाई रूट सामान्य नहीं होते, तब तक नेपाली बाजार में राहत जल्दी नहीं दिखेगी। फिलहाल कारोबारियों की नजर बारिश, फसल की स्थिति और सरकारी हस्तक्षेप पर टिकी है, क्योंकि प्याज के दाम ने इस बार दोनों तरफ महंगाई की बहस को फिर से गर्म कर दिया है।
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