फोनपे का आईपीओ जल्द, सेबी की मिली मंजूरी, 12 हजार करोड़ के साथ बाजार में उतरेगी कंपनी, आप भी जान लें पूरा अपडेट
- Shiv Kumar
- 21 Jan, 2026
डिजिटल पेमेंट और UPI मार्केट की सबसे बड़ी कंपनी फोनपे जल्द ही शेयर बाजार में दस्तक देने जा रही है। कंपनी को अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए बाजार नियामक सेबी (SEBI) से मंजूरी मिल गई है। इस अप्रूवल के बाद अब फोनपे जल्द ही अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करेगी। बाजार सूत्रों के मुताबिक, यह आईपीओ करीब 12,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, जो भारतीय डिजिटल पेमेंट सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा IPO माना जा रहा है। इससे पहले साल 2021 में पेटीएम ने 18,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लॉन्च किया था।
IPO पूरी तरह OFS के जरिए, नई हिस्सेदारी जारी नहीं होगी
फोनपे का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए लाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि कंपनी कोई नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। बताया जा रहा है कि इस आईपीओ के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे बड़े निवेशक अपनी करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में उतार सकते हैं। फिलहाल फोनपे में वॉलमार्ट की हिस्सेदारी 73 प्रतिशत से ज्यादा है। कंपनी की कुल वैल्यूएशन लगभग 15 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.33 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
UPI मार्केट में फोनपे का दबदबा बरकरार
फोनपे की सबसे बड़ी ताकत UPI मार्केट में उसका मजबूत दबदबा है। देश के कुल डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन में फोनपे की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत बताई जाती है। वहीं, गूगल पे लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर है। कंपनी हर महीने करीब 1000 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करती है, जिनकी कुल वैल्यू 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक होती है। फोनपे के पास इस समय 53 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जो इसे भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट कंपनियों में शामिल करता है।
लिस्टिंग से पहले बदला कंपनी का स्ट्रक्चर
आईपीओ की तैयारी के तहत फोनपे ने 16 अप्रैल को खुद को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल लिया था। यह प्रक्रिया भारतीय शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी मानी जाती है। कंपनी ने फरवरी में IPO की योजना पर काम शुरू किया था। इससे पहले दिसंबर 2022 में फोनपे ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत शिफ्ट किया था। साथ ही, कंपनी ने अपने नॉन-पेमेंट बिजनेस को अलग-अलग सब्सिडियरी कंपनियों में बांट दिया, ताकि मुख्य पेमेंट बिजनेस पर फोकस और मजबूत किया जा सके।
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