बजट 2026 में इनकम टैक्स को लेकर क्या कुछ हुआ? रिवाइज्ड रिटर्न और पैसे विदेश भेजने को लेकर हुए ये बड़े फैसले!

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बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं हुआ, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न की समयसीमा बढ़ाई गई और विदेश पैसे भेजने पर टैक्स घटाया गया है। वहीं F&O ट्रेडिंग महंगी और गोल्ड बॉन्ड निवेश के नियम सख्त किए गए हैं, जिससे निवेशकों पर असर पड़ेगा।

नोएडा। केंद्रीय बजट में इस बार इनकम टैक्स को लेकर कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, लेकिन टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कुछ अहम प्रक्रियात्मक सुधार जरूर किए गए हैं। सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और अनुपालन आसान करने पर फोकस रखा है। रिवाइज्ड रिटर्न भरने की समयसीमा बढ़ाने से लेकर विदेश पैसे भेजने पर टैक्स घटाने तक कई फैसले लिए गए हैं, जिनका सीधा असर आम नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और निवेशकों पर पड़ेगा। टैक्स स्लैब और रेट्स में भले कोई बदलाव न हुआ हो, लेकिन नियमों में किए गए छोटे बदलाव आगे चलकर बड़ी राहत दे सकते हैं।

नया इनकम टैक्स कानून और रिवाइज्ड रिटर्न पर राहत
सरकार ने पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने की घोषणा की है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इसका मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना है, न कि टैक्स दरों में बदलाव करना। इसके साथ ही अब टैक्सपेयर्स 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक मामूली फीस देकर रिवाइज्ड रिटर्न भर सकेंगे। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो रिटर्न भरने के बाद गलती सुधारने का मौका चूक जाते थे। साथ ही अब अगर आपकी आय टैक्स योग्य नहीं है, तो TDS कटवाने से बचने के लिए अलग से फॉर्म 15G या 15H देने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

विदेश पैसे भेजना सस्ता, लेकिन ट्रेडिंग महंगी
पढ़ाई, इलाज या टूर पैकेज के लिए विदेश पैसे भेजने पर लगने वाला TCS अब 5% या 20% के बजाय सीधे 2% कर दिया गया है। इससे विदेश में पढ़ने वाले छात्रों और यात्रा करने वालों को राहत मिलेगी। दूसरी ओर, शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शंस ट्रेडिंग महंगी हो गई है। सरकार ने फ्यूचर ट्रेडिंग पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% कर दिया है। इसका मतलब है कि हर ट्रेड पर अब निवेशकों को पहले से ज्यादा टैक्स देना होगा, जिससे छोटे ट्रेडर्स की लागत बढ़ सकती है।

गोल्ड बॉन्ड और टैक्स रिजीम में स्थिति जस की तस
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को लेकर भी नियम बदले गए हैं। अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर कैपिटल गेन टैक्स छूट नहीं मिलेगी। टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जिन्होंने बॉन्ड सीधे RBI से खरीदे और पूरी अवधि तक होल्ड किया। वहीं टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पुरानी व्यवस्था में 2.5 लाख तक आय टैक्स फ्री रहेगी, जबकि नई टैक्स रिजीम में पहले की तरह 4 लाख तक टैक्स नहीं लगेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले साल बड़ी छूट दिए जाने के बाद इस साल बदलाव की उम्मीद कम थी।

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