ईरान-ईजराइल जंग से टूटा बाजार, निफ्टी 700 तो सेंसेक्स 2000 अंक टूटा, क्रूड ऑयल 10 दिन में 60 फीसदी चढ़ा

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। सेंसेक्स करीब 1700 अंक और निफ्टी 500 अंक टूट गया। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर 92.28 पर पहुंच गया।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजारों के दबाव के बीच सोमवार (9 मार्च) को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 1700 अंक यानी 2.15% गिरकर 77,200 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं Nifty 50 भी लगभग 500 अंक यानी 2.12% टूटकर 23,500 के स्तर पर पहुंच गया। आज बैंक, ऑटो, मेटल, एनर्जी और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे बाजार में दबाव बना हुआ है।


भू-राजनीतिक तनाव से निवेशकों में बढ़ी चिंता

विश्लेषकों का कहना है कि Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव तथा United States की भूमिका के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। जियोपॉलिटिकल तनाव या युद्ध जैसी स्थिति में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले निवेश से निकलकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसके कारण शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिलती है।


बाजार गिरने की तीन बड़ी वजहें

बाजार में गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं—

  • ईरान और इजराइल के बीच संभावित युद्ध से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने का डर।

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, जिससे भारत का आयात बिल और महंगाई बढ़ सकती है।

  • अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर पड़ना।


कच्चा तेल तेजी से महंगा, 116 डॉलर प्रति बैरल के पार

वैश्विक बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड 25% से ज्यादा चढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए तनाव के बाद महज 10 दिनों में कच्चे तेल की कीमत करीब 60% तक बढ़ चुकी है। इससे पहले 2022 में Russia-Ukraine War के दौरान तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गई थीं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है और ये 5 से 6 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है।


डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 46 पैसे कमजोर होकर 92.28 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालात और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की वजह से विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ी है, जिससे रुपये में कमजोरी आई है।


वैश्विक बाजारों का भी असर

वैश्विक बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका में 6 मार्च को Dow Jones Industrial Average 453 अंक गिरकर 47,501 पर बंद हुआ। वहीं Nasdaq Composite 1.59% गिरकर 22,387 और S&P 500 90 अंक टूटकर 6,740 के स्तर पर बंद हुआ। भारतीय बाजार में इससे पहले 6 मार्च को भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 1097 अंक टूटकर 78,919 पर बंद हुआ था और निफ्टी 315 अंक गिरकर 24,450 पर आ गया था।

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