लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश, 50 से ज्यादा सांसदों का मिला समर्थन, कार्यवाही में पक्षपात का आरोप
- Shiv Kumar
- 10 Mar, 2026
लोकसभा में मंगलवार को राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। इस प्रस्ताव को 50 से ज्यादा सांसदों का समर्थन मिला, जिसके बाद इसे सदन में चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया। नियमों के अनुसार अब इस प्रस्ताव पर करीब 10 घंटे तक बहस कराई जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही चलाने में निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं। इसी को आधार बनाकर यह प्रस्ताव लाया गया है। प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद सदन में माहौल काफी गरम हो गया और कई सांसदों ने अपनी-अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
डिप्टी स्पीकर का मुद्दा बहस के केंद्र में आया
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होने से पहले ही डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति का मुद्दा उठ गया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार से पूछा कि जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया है, तब सदन की कार्यवाही कौन संचालित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है, जो संसदीय परंपरा के विपरीत है। इस दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने भी नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तो स्पीकर स्वयं कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्होंने सुझाव दिया कि सदन की सहमति से किसी सदस्य को कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना जाए।
सत्ता पक्ष ने नियमों का हवाला देकर दिया जवाब
विपक्ष की आपत्तियों के बीच सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी अपनी बात रखी। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर की शक्तियों के साथ कार्यवाही चला सकता है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भी इसी तर्क का समर्थन किया। आखिर में पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें सदन की कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जो सदस्य पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना चाहते हैं, उन्हें बाद में मौका दिया जाएगा।
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