देश के कई राज्यों में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप, बंद होने की कगार पर रेस्टोरेंट्स और ढाबे, केंद्र सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955' किया लागू, आयात बंद होने से लिया फैसला
- Shiv Kumar
- 10 Mar, 2026
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव का असर अब भारत की गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। जंग की वजह से फारस की खाड़ी से गुजरने वाला अहम समुद्री रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग ठप हो गया है, जिससे गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर देश के कई राज्यों में देखने को मिल रहा है, जहां कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक या भारी कटौती कर दी गई है।दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई शहरों में हालात ऐसे हैं कि रेस्टोरेंट और ढाबों को अस्थायी रूप से बंद करने की नौबत आ गई है। इसी बीच जमाखोरी रोकने और सप्लाई कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में एसेंशियल कमोडिटी Act 1955 लागू कर दिया है।
गैस सप्लाई को चार कैटेगरी में बांटा गया
संकट को देखते हुए सरकार ने गैस सप्लाई को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया है, ताकि जरूरी सेवाओं पर ज्यादा असर न पड़े। पहली कैटेगरी में घरों में इस्तेमाल होने वाली PNG और वाहनों के लिए CNG शामिल है। इनकी सप्लाई पहले की तरह पूरी जारी रहेगी। दूसरी कैटेगरी में खाद बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं, जिन्हें करीब 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद उत्पादन में ही किया गया है। तीसरी श्रेणी में बड़े उद्योग आते हैं, जिन्हें नेशनल गैस ग्रिड के जरिए उनकी जरूरत की लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी। वहीं चौथी श्रेणी में छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट शामिल हैं, जिन्हें भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से करीब 80 प्रतिशत गैस देने की व्यवस्था की गई है।
कई राज्यों में होटल और कारोबार प्रभावित
गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में बुकिंग के चार से पांच दिन बाद भी सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे और नागपुर में कॉमर्शियल गैस की भारी कटौती की गई है। मुंबई में करीब 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं, जबकि होटल एसोसिएशन ‘आहार’ ने चेतावनी दी है कि सप्लाई जल्द नहीं सुधरी तो आधे से ज्यादा होटल बंद हो सकते हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी होटल, मैरिज गार्डन और छोटे उद्योगों से जुड़े लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कारोबारी संगठनों का कहना है कि गैस का कोई विकल्प न होने की वजह से उनका कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
संकट से निपटने के लिए सरकार के कदम
ऊर्जा संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की नियमित समीक्षा कर रही है। इसके अलावा एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं। जमाखोरी रोकने के लिए गैस डिलीवरी के दौरान OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संकट की दो बड़ी वजहें हैं—पहली, जंग की वजह से Strait of Hormuz का लगभग बंद होना और दूसरी, कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद उत्पादन रुकना। भारत अपनी बड़ी मात्रा में गैस आयात के लिए कतर पर निर्भर है, इसलिए इसका सीधा असर देश की सप्लाई पर पड़ा है।
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