सनस्क्रीन खरीदते समय ध्यान रखें ये 3 जरूरी बातें, ताकि त्वचा को मिले पूरा प्रोटेक्शन

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सनस्क्रीन खरीदते समय सही एसपीएफ, यूवीए-यूवीबी प्रोटेक्शन और अपनी त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। सही उत्पाद चुनने और नियमित रूप से इस्तेमाल करने से त्वचा को धूप की हानिकारक किरणों से बचाया जा सकता है और त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ रहती है।

गर्मी का मौसम आते ही तेज धूप और अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा को बचाना बेहद जरूरी हो जाता है। डॉक्टरों और स्किन विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक धूप में रहने से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है, जैसे सनबर्न, झाइयां, त्वचा का समय से पहले बूढ़ा दिखना और कुछ मामलों में त्वचा से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। यही वजह है कि आजकल सनस्क्रीन का इस्तेमाल काफी आम हो गया है। लेकिन बाजार में मिलने वाले सैकड़ों ब्रांड और अलग-अलग तरह के सनस्क्रीन के कारण लोगों के लिए सही विकल्प चुनना आसान नहीं होता। कई लोग सिर्फ ऊंचा एसपीएफ देखकर सनस्क्रीन खरीद लेते हैं, जबकि सही सुरक्षा के लिए कई अन्य बातों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सनस्क्रीन सही तरीके से चुना और इस्तेमाल किया जाए तो यह त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से काफी हद तक बचा सकता है। इसलिए सनस्क्रीन खरीदते समय कुछ जरूरी बातों को समझना बेहद जरूरी है।


सही SPF और UVA/UVB प्रोटेक्शन चुनें

सनस्क्रीन खरीदते समय सबसे पहले उसके एसपीएफ और यूवी प्रोटेक्शन को देखना जरूरी होता है। एसपीएफ यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर यह बताता है कि सनस्क्रीन आपकी त्वचा को सूरज की किरणों से कितनी देर तक सुरक्षित रख सकता है। आमतौर पर रोजाना इस्तेमाल के लिए SPF 30 या उससे अधिक का सनस्क्रीन अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही यह देखना भी जरूरी है कि सनस्क्रीन में ब्रॉड स्पेक्ट्रम प्रोटेक्शन हो, यानी वह UVA और UVB दोनों तरह की किरणों से बचाव करे। अगर सनस्क्रीन में दोनों प्रकार की सुरक्षा नहीं है तो त्वचा को पूरी तरह सुरक्षा नहीं मिल पाती। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनने की सलाह देते हैं।


SPF क्या है और क्यों जरूरी है

एसपीएफ यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर सनस्क्रीन की सुरक्षा क्षमता को दर्शाता है। यह बताता है कि सनस्क्रीन लगाने के बाद आपकी त्वचा बिना जले कितनी देर तक धूप में रह सकती है। उदाहरण के लिए SPF 30 का मतलब है कि यह सामान्य स्थिति की तुलना में लगभग 30 गुना ज्यादा समय तक त्वचा को सूरज से बचाने में मदद कर सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इसे पूरे दिन एक बार लगाने से ही सुरक्षा मिल जाएगी। धूप में लंबे समय तक रहने पर हर दो से तीन घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगाना जरूरी होता है। सही एसपीएफ चुनने से त्वचा को बेहतर सुरक्षा मिलती है और सनबर्न का खतरा कम हो सकता है।


UVA और UVB प्रोटेक्शन का महत्व

सूरज की किरणों में मुख्य रूप से दो तरह की अल्ट्रावॉयलेट किरणें होती हैं, जिन्हें UVA और UVB कहा जाता है। UVA किरणें त्वचा को गहराई तक प्रभावित कर सकती हैं और समय से पहले झुर्रियां और उम्र बढ़ने के लक्षण पैदा कर सकती हैं। वहीं UVB किरणें त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाती हैं और सनबर्न का कारण बन सकती हैं। अगर सनस्क्रीन केवल UVB से बचाव करता है और UVA से नहीं, तो त्वचा को पूरी सुरक्षा नहीं मिलती। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा ऐसे सनस्क्रीन का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं जिन पर ब्रॉड स्पेक्ट्रम लिखा हो। इससे दोनों प्रकार की हानिकारक किरणों से सुरक्षा मिल सकती है।


अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार सनस्क्रीन चुनें

हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए सनस्क्रीन भी उसी के अनुसार चुनना चाहिए। अगर किसी की त्वचा तैलीय है तो भारी और चिपचिपा सनस्क्रीन उसकी त्वचा के लिए सही नहीं होगा। वहीं सूखी त्वचा वाले लोगों को मॉइस्चराइजिंग गुणों वाला सनस्क्रीन ज्यादा फायदा दे सकता है। बाजार में जेल, क्रीम और लोशन जैसे कई प्रकार के सनस्क्रीन उपलब्ध हैं। इसलिए अपनी त्वचा के प्रकार को समझकर सही विकल्प चुनना जरूरी है। सही सनस्क्रीन न केवल धूप से बचाव करता है बल्कि त्वचा को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।


तैलीय त्वचा के लिए सनस्क्रीन

तैलीय त्वचा वाले लोगों को ऐसा सनस्क्रीन चुनना चाहिए जो हल्का और नॉन-ऑयली हो। जेल आधारित या वॉटर बेस्ड सनस्क्रीन इस तरह की त्वचा के लिए बेहतर माने जाते हैं। ऐसे सनस्क्रीन त्वचा पर ज्यादा भारी महसूस नहीं होते और पोर्स को भी ब्लॉक नहीं करते। इसके अलावा नॉन-कॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना भी अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे पिंपल या एक्ने की समस्या कम हो सकती है। तैलीय त्वचा वाले लोगों को ऐसे उत्पादों से बचना चाहिए जिनमें ज्यादा तेल या भारी क्रीम जैसा टेक्सचर हो। सही सनस्क्रीन चुनने से त्वचा को सुरक्षा भी मिलती है और अतिरिक्त तेल की समस्या भी कम हो सकती है।


संवेदनशील त्वचा के लिए सनस्क्रीन

संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सनस्क्रीन चुनते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कई बार कुछ रासायनिक तत्व त्वचा में जलन या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को हल्के और त्वचा के लिए सुरक्षित तत्वों वाले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। मिनरल आधारित सनस्क्रीन अक्सर संवेदनशील त्वचा के लिए बेहतर माने जाते हैं, क्योंकि इनमें जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे तत्व होते हैं जो त्वचा पर एक सुरक्षा परत बनाते हैं। इसके अलावा खुशबू या तेज रसायनों वाले उत्पादों से बचना भी जरूरी होता है। इससे त्वचा को नुकसान से बचाया जा सकता है।


सामान्य त्वचा के लिए सबसे अच्छा सनस्क्रीन

जिन लोगों की त्वचा सामान्य होती है, उनके पास सनस्क्रीन के कई विकल्प होते हैं। वे क्रीम या लोशन आधारित सनस्क्रीन आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि सामान्य त्वचा के लिए भी ब्रॉड स्पेक्ट्रम और पर्याप्त एसपीएफ वाला सनस्क्रीन चुनना जरूरी होता है। इसके अलावा ऐसा उत्पाद चुनना बेहतर होता है जो त्वचा को मॉइस्चराइज भी करे। इससे त्वचा को धूप से सुरक्षा मिलने के साथ-साथ उसका संतुलन भी बना रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना सामान्य त्वचा वालों के लिए भी उतना ही जरूरी है जितना अन्य त्वचा प्रकारों के लिए।


सनस्क्रीन की गुणवत्ता और सामग्री पर ध्यान दें

सनस्क्रीन खरीदते समय सिर्फ ब्रांड या कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होता। उसकी गुणवत्ता और सामग्री भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद में कौन-कौन से तत्व इस्तेमाल किए गए हैं, यह जानकारी लेबल पर दी होती है। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छे सनस्क्रीन में त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले कठोर रसायनों की मात्रा कम होनी चाहिए। इसके अलावा एक्सपायरी डेट और प्रोडक्ट की विश्वसनीयता भी देखनी चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाला सनस्क्रीन त्वचा को बेहतर सुरक्षा देने के साथ-साथ लंबे समय तक सुरक्षित उपयोग की सुविधा देता है।


रासायनिक बनाम मिनरल सनस्क्रीन

बाजार में मुख्य रूप से दो प्रकार के सनस्क्रीन मिलते हैं—रासायनिक और मिनरल सनस्क्रीन। रासायनिक सनस्क्रीन त्वचा पर लगने के बाद सूरज की किरणों को सोख लेते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचाने से रोकते हैं। वहीं मिनरल सनस्क्रीन त्वचा की सतह पर एक परत बनाकर किरणों को वापस परावर्तित कर देते हैं। दोनों प्रकार के सनस्क्रीन के अपने फायदे और सीमाएं होती हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए मिनरल सनस्क्रीन अक्सर बेहतर विकल्प माना जाता है। इसलिए खरीदने से पहले यह समझना जरूरी है कि कौन-सा प्रकार आपकी त्वचा के लिए अधिक उपयुक्त है।


रोजाना और सही तरीके से सनस्क्रीन का उपयोग करें

सनस्क्रीन का फायदा तभी मिलता है जब इसे सही तरीके से और नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार घर से बाहर निकलने से लगभग 15 से 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाना चाहिए। इसके अलावा अगर लंबे समय तक धूप में रहना हो तो हर दो से तीन घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी होता है। कई लोग केवल गर्मियों में ही सनस्क्रीन का उपयोग करते हैं, जबकि विशेषज्ञ पूरे साल इसका इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इससे त्वचा को लगातार सुरक्षा मिलती है और धूप से होने वाले नुकसान का खतरा कम हो सकता है।


महिलाओं और पुरुषों के लिए विशेष सुझाव

सनस्क्रीन का इस्तेमाल महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से जरूरी है। अक्सर पुरुष धूप में ज्यादा समय बिताते हैं, लेकिन कई बार वे त्वचा की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों को भी रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं महिलाएं मेकअप के साथ भी सनस्क्रीन का उपयोग कर सकती हैं। आजकल कई ऐसे उत्पाद उपलब्ध हैं जिनमें सनस्क्रीन और मेकअप दोनों के गुण होते हैं। सही तरीके से इस्तेमाल करने से त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित रह सकती है।


बच्चों के लिए सनस्क्रीन का सही चुनाव

बच्चों की त्वचा वयस्कों की तुलना में ज्यादा नाजुक होती है, इसलिए उनके लिए सनस्क्रीन चुनते समय विशेष सावधानी जरूरी होती है। बच्चों के लिए हल्के और सुरक्षित तत्वों वाले सनस्क्रीन का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। आमतौर पर मिनरल बेस्ड सनस्क्रीन बच्चों की त्वचा के लिए अधिक सुरक्षित समझे जाते हैं। इसके अलावा बच्चों को लंबे समय तक तेज धूप में रहने से भी बचाना चाहिए। टोपी, छाया और हल्के कपड़ों का उपयोग भी उनकी त्वचा की सुरक्षा में मदद कर सकता है। सही सनस्क्रीन का इस्तेमाल बच्चों की त्वचा को नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।


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