गुरुवार को रिकॉर्ड गिरावट के बाद आज बाजार में तेजी, सेंसेक्स 800 अंक चढ़ा, निफ्टी में 250 अंकों की बढ़त, क्रूड ऑयल 106 डॉलर पर आया

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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के बाद जोरदार रिकवरी दिखी। सेंसेक्स 800 अंक और निफ्टी 240 अंक चढ़ा। तेल कीमतों में गिरावट से बाजार को सपोर्ट मिला, जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार 20 मार्च को शानदार तेजी देखने को मिली है। एक दिन पहले बड़ी गिरावट के बाद आज बाजार ने जोरदार वापसी की। BSE Sensex करीब 800 अंक चढ़कर 75,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, वहीं Nifty 50 भी 240 अंकों की तेजी के साथ 23,240 के पार पहुंच गया है। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि निचले स्तर पर ‘वैल्यू बाइंग’ की वजह से बाजार में यह तेजी आई है, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।


गिरावट के बाद वापसी, निवेशकों ने किया वैल्यू बाइंग का सहारा
दरअसल, 19 मार्च को बाजार में 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली थी, जब सेंसेक्स करीब 2497 अंक टूट गया था। ऐसे में आज कई निवेशकों ने इसे खरीदारी का मौका माना और सस्ते स्तर पर शेयर खरीदे। इसका सीधा असर बाजार की तेजी के रूप में दिखा। जानकारों के मुताबिक, इस तरह की गिरावट के बाद अक्सर बाजार में रिकवरी देखने को मिलती है। हालांकि, अभी भी वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।


तेल की कीमतों में राहत, ग्लोबल संकेतों से बाजार को सपोर्ट
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, जिससे बाजार को सहारा मिला है। Brent Crude करीब 2% गिरकर 107 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इससे पहले इसमें तेज उछाल देखा गया था। वहीं एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला—दक्षिण कोरिया का बाजार बढ़त में रहा, जबकि हांगकांग में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर आज के कारोबार पर सीमित रूप में दिखा।


रुपया कमजोर, डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
इधर, रुपये पर दबाव बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गिरकर 93.24 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण रुपये में यह कमजोरी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आती है या जंग लंबी खिंचती है, तो इसका असर बाजार और रुपये दोनों पर पड़ सकता है।

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