अब बिना OTP के होंगे ऑनलाइन पेमेंट, 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' से होगा वेरिफिकेशन, सिम और डिवाइस मैच होने पर ही सक्सेज होगा ट्रांजैक्शन
- Shiv Kumar
- 03 Apr, 2026
देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां अब ऑनलाइन पेमेंट को और आसान और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव करने जा रही हैं। ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ नाम की नई तकनीक पर काम चल रहा है, जिसके लागू होने के बाद वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की जरूरत काफी हद तक खत्म हो सकती है। यह सिस्टम बैकग्राउंड में ही यह जांच करेगा कि बैंक एप में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और फोन का सिम कार्ड मैच कर रहे हैं या नहीं। अगर दोनों में मेल नहीं हुआ तो ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक हो जाएगा। खास बात यह है कि इसमें यूजर को कुछ भी अलग से करने की जरूरत नहीं होगी।
बैंक और टेलीकॉम मिलकर कर रहे टेस्टिंग
समीर शेट्टी के मुताबिक, बैंक टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर इस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति बैंक एप में लॉग-इन है, लेकिन उसका मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड नंबर से अलग है, तो टेलीकॉम नेटवर्क तुरंत संकेत दे देगा। इससे बैंक बिना ग्राहक को परेशान किए संभावित फ्रॉड को पहचान सकेंगे। यह तकनीक eSIM पर भी काम करेगी, जिससे सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे फ्रॉड पर रोक लगेगी।
बैकग्राउंड में काम करेगा पूरा सिस्टम
साइबर एक्सपर्ट सुंदरेश्वर कृष्णमूर्ति का कहना है कि पहले की सुरक्षा परतें आसानी से हैक हो जाती थीं, लेकिन अब वेरिफिकेशन को नेटवर्क के मुख्य हिस्से में शिफ्ट किया जा रहा है। यह सिस्टम पूरी तरह बैकग्राउंड में काम करेगा, जिसे न तो यूजर देख पाएगा और न ही हैकर आसानी से समझ पाएंगे। इसके साथ ही फेस आईडी और एप के अंदर ही कोड जनरेट होने जैसे फीचर्स भी जोड़े जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा और मजबूत होगी।
RBI के नियमों के साथ बढ़ेगी सुरक्षा
भारतीय रिजर्व बैंक के नए नियमों के अनुसार, अब सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य है। इसमें पासवर्ड, OTP या बायोमेट्रिक्स जैसे विकल्प शामिल हैं। हालांकि SMS वाले OTP को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, लेकिन बैंकों को आधुनिक सुरक्षा तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब वॉट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर भी OTP भेजने की सुविधा दी जा सकती है, जिससे यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होगा।
डिजिटल पेमेंट होगा आसान और सुरक्षित
इस नई तकनीक से न सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट आसान होगा, बल्कि ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या भी कम होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे डिजिटल पेमेंट में लोगों का भरोसा और बढ़ेगा और ज्यादा लोग ऑनलाइन ट्रांजैक्शन अपनाएंगे। आने वाले समय में यह सिस्टम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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