10 हजार रुपये से ज्यादा का ट्रांजैक्शन एक घंटे के लिए हो सकता है होल्ड, पेमेंट कैंसिल करने का भी रहेगा ऑप्शन, डिजिटल फ्रॉड रोकने का प्लान
- Shiv Kumar
- 10 Apr, 2026
देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए अब ऑनलाइन पेमेंट के नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने प्रस्ताव दिया है कि ₹10 हजार से ज्यादा के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी लागू की जा सकती है। इसका मकसद यूजर्स को जल्दबाजी में होने वाले गलत या फ्रॉड ट्रांजैक्शन को रोकने का मौका देना है। फिलहाल ज्यादातर डिजिटल पेमेंट तुरंत हो जाते हैं, जिससे यूजर को सोचने या गलती सुधारने का समय नहीं मिलता। आरबीआई का मानना है कि ठग अक्सर लोगों पर मानसिक दबाव बनाकर जल्दी पैसे ट्रांसफर करवाते हैं, ऐसे में यह देरी एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी।
फ्रॉड रोकने के लिए नए सुरक्षा फीचर्स पर जोर
इस प्रस्ताव में सिर्फ देरी ही नहीं, बल्कि कई और अहम सुरक्षा उपाय भी शामिल किए गए हैं। खासतौर पर 70 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की योजना है। ऐसे मामलों में ₹50 हजार से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति यानी ‘ट्रस्टेड पर्सन’ की मंजूरी जरूरी हो सकती है। इसके अलावा यूजर्स को ‘व्हाइटलिस्ट’ का विकल्प भी मिलेगा, जिसमें वे अपने भरोसेमंद लोगों या मर्चेंट्स को जोड़ सकेंगे। इन व्हाइटलिस्टेड अकाउंट्स पर ट्रांजैक्शन करते समय 1 घंटे की देरी लागू नहीं होगी, जिससे रोजमर्रा के लेन-देन में दिक्कत नहीं आएगी।
‘किल स्विच’ से तुरंत रोक सकेंगे पेमेंट
आरबीआई ने एक और अहम फीचर ‘किल स्विच’ का सुझाव दिया है। अगर किसी यूजर को लगे कि उसका अकाउंट हैक हो गया है या कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन हो रहा है, तो वह एक क्लिक में अपनी सभी डिजिटल पेमेंट सेवाएं बंद कर सकेगा। यह फीचर खासतौर पर उन मामलों में मददगार होगा, जहां तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है। पिछले साल देश में डिजिटल फ्रॉड से 22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ था। खास बात यह है कि ₹10 हजार से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल मामलों का लगभग आधा हिस्सा हैं, लेकिन फ्रॉड की कुल रकम में इनकी हिस्सेदारी बेहद ज्यादा है।
जल्द आ सकती हैं गाइडलाइन, लोगों से मांगे सुझाव
फिलहाल भारतीय रिज़र्व बैंक इस प्रस्ताव पर बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ चर्चा कर रहा है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पेमेंट की रफ्तार और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में इस पर विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आरबीआई ने इस प्रस्ताव पर 8 मई तक आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव भी मांगे हैं, ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके।
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