महिला आरक्षण को लेकर 3 संशोधन बिल लोकसभा में पेश, अखिलेश बोले- मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण दो, शाह बोले- आप टिकट दे दो
- Shiv Kumar
- 16 Apr, 2026
लोकसभा में बुधवार को महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन अहम संशोधन बिल पेश किए गए, जिसके बाद सदन में तीखी बहस देखने को मिली। बिल पेश होने के करीब डेढ़ घंटे बाद यह तय करने के लिए वोटिंग कराई गई कि इन पर चर्चा की जाए या नहीं। इस दौरान 251 सांसदों ने चर्चा के पक्ष में वोट दिया, जबकि 185 सांसदों ने विरोध किया। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव साफ नजर आया, खासकर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग को लेकर माहौल गरम हो गया।
मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर छिड़ी बहस
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि देश की आधी आबादी को आरक्षण देने की बात हो रही है, लेकिन मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या प्रावधान होगा, यह स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना गैर संवैधानिक है और इसका सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी तंज कसा कि अगर समाजवादी पार्टी चाहती है तो अपने सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है। इस बयान के बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और बहस और तेज हो गई।
कांग्रेस और अन्य दलों ने भी जताया विरोध
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सी. वेणुगोपाल ने भी बिल का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि जब तक सभी वर्गों को समान रूप से प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक यह बिल अधूरा रहेगा। विपक्ष के कई नेताओं ने मिलकर सरकार से बिल में बदलाव की मांग की, ताकि सभी समुदायों की महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिल सके।
सीटें बढ़ाने और महिलाओं को 273 सीटें देने का प्रस्ताव
संशोधन बिल में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि अभी यह संख्या 543 है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें तय की जाएंगी। साथ ही, सीटों की सही संख्या तय करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। प्रस्ताव के मुताबिक, कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बड़ा बदलाव आएगा, जबकि विपक्ष इस पर और स्पष्टता की मांग कर रहा है।
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