विजय थलापति बने तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री, 9 और मंत्रियों ने भी ली शपथ, राहुल गांधी भी रहे मौजूद

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अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 59 साल बाद राज्य में DMK-AIADMK के अलावा किसी तीसरी पार्टी की सरकार बनी है। TVK ने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया।

तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख और अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित समारोह में उन्होंने तमिल भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। शपथ के दौरान विजय निर्धारित पाठ से आगे बोलने लगे, जिस पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उन्हें टोका और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया गया है। विजय के साथ उनकी पार्टी के 9 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज और केए सेंगोट्टैयन जैसे नाम शामिल हैं। फिलहाल सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है। इससे पहले विजय ने राज्यपाल को TVK, कांग्रेस, CPI, CPM, VCK और IUML के कुल 121 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था। इसके बाद उन्हें सरकार बनाने का न्योता मिला। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है। TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि 1967 के बाद पहली बार DMK और AIADMK के अलावा किसी तीसरी पार्टी की सरकार बनी है। राज्यपाल ने विजय को 13 मई तक विधानसभा में बहुमत साबित करने का निर्देश दिया है। समारोह की शुरुआत वंदेमातरम से हुई, उसके बाद राष्ट्रगान और अंत में तमिलगान हुआ। यह पहला मौका रहा जब किसी मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में पूरा वंदेमातरम गाया गया।


फैन क्लब से सत्ता तक पहुंची विजय की राजनीति

विजय की राजनीतिक सफलता के पीछे उनका विशाल फैन नेटवर्क भी बड़ी वजह माना जा रहा है। उनके फैंस संगठन विजय मक्कल यक्कम (VMI) ने चुनाव के दौरान बूथ स्तर तक काम किया। 2009 में छोटे-छोटे फैन क्लबों को मिलाकर VMI बनाया गया था। बाद में यही संगठन TVK की राजनीतिक ताकत बना। फरवरी 2024 में पार्टी की घोषणा के बाद फैन क्लब के जिला पदाधिकारियों को ही पार्टी की जिम्मेदारी दी गई। विक्रविंडी की पहली रैली में लाखों लोगों की भीड़ जुटी थी। तमिलनाडु में ‘रसिगर मंद्रम’ यानी फैन क्लब की राजनीति पहले भी MGR और जयललिता जैसे नेताओं को सत्ता तक पहुंचा चुकी है। विजय ने भी अपनी फिल्मों में बनी ‘जननायक’ वाली छवि को राजनीतिक अभियान में बदला और इसका फायदा चुनाव में मिला।


59 साल बाद बदला तमिलनाडु का राजनीतिक समीकरण

तमिलनाडु में पिछले करीब 59 वर्षों से राजनीति DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही। 1967 में कांग्रेस की हार के बाद पहली बार DMK सत्ता में आई थी। बाद में MGR ने AIADMK बनाकर राज्य की राजनीति को दो ध्रुवों में बांट दिया। लेकिन इस बार TVK ने दोनों बड़े दलों का समीकरण बिगाड़ दिया। विजय की पार्टी ने 46 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 108 सीटें जीतीं। उत्तर और तटीय तमिलनाडु में पार्टी का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिला। दूसरी ओर DMK और AIADMK दोनों को बड़ा नुकसान हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के कई मंत्री चुनाव हार गए, हालांकि उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन अपनी सीट बचाने में सफल रहे। राजनीतिक जानकार इसे तमिलनाडु की राजनीति में नई शुरुआत मान रहे हैं।

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