सिम-स्वैप और फिशिंग स्कैम से बढ़ा खतरा, एक क्लिक में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, अभी जान लें बचने के उपाय
- Shiv Kumar
- 14 May, 2026
डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने लोगों की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। बैंकिंग, शॉपिंग, बिल पेमेंट और दूसरे जरूरी काम अब कुछ मिनटों में ऑनलाइन हो जाते हैं। लेकिन डिजिटल सुविधाओं के साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। अब ठगों को बैंक लूटने के लिए हथियारों की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि एक फर्जी लिंक या मोबाइल नंबर के जरिए ही लोगों के बैंक अकाउंट खाली किए जा रहे हैं। हाल के समय में SIM-Swap और फिशिंग जैसे साइबर स्कैम तेजी से बढ़े हैं। साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों की जल्दबाजी, डर और भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें ठगी का शिकार बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक नुकसान की वजह बन सकती है। ऐसे में लोगों को इन स्कैम्स के तरीकों और बचाव के उपायों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
SIM-Swap स्कैम में मोबाइल नंबर पर कर लेते हैं कब्जा
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार SIM-Swap स्कैम बेहद खतरनाक माना जाता है। इसमें अपराधी मोबाइल ऑपरेटर को यह भरोसा दिलाते हैं कि असली यूजर का सिम खो गया है या खराब हो गया है। इसके बाद वे नया सिम जारी करवा लेते हैं और मोबाइल नंबर का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं। जैसे ही नया सिम एक्टिव होता है, असली यूजर के फोन का नेटवर्क बंद हो जाता है और बैंक ओटीपी, कॉल और मैसेज सीधे ठगों तक पहुंचने लगते हैं। इसके जरिए वे बैंक अकाउंट तक पहुंच बनाकर पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर अचानक फोन में लंबे समय तक नेटवर्क न आए या सिम अपग्रेड से जुड़े कॉल आने लगें, तो तुरंत मोबाइल कंपनी और बैंक से संपर्क करना चाहिए।
फिशिंग लिंक बन रहे सबसे बड़ा जाल
फिशिंग स्कैम में अपराधी बैंक, बिजली विभाग, इनकम टैक्स या कुरियर कंपनी के नाम पर फर्जी मैसेज और ईमेल भेजते हैं। इनमें दिए गए लिंक असली वेबसाइट जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन जैसे ही यूजर वहां अपनी बैंक डिटेल, कार्ड नंबर या ओटीपी दर्ज करता है, सारी जानकारी सीधे हैकर तक पहुंच जाती है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक पर तुरंत क्लिक नहीं करना चाहिए और वेबसाइट के एड्रेस को ध्यान से जांचना जरूरी है। सुरक्षा के लिए Google Authenticator जैसे ऐप आधारित ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करना बेहतर माना जा रहा है। साथ ही सिम लॉक, मजबूत पासवर्ड और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी कम साझा करने जैसी सावधानियां भी जरूरी हैं। अगर किसी को साइबर फ्रॉड का शक हो, तो तुरंत बैंक को सूचना देकर अकाउंट ब्लॉक कराना चाहिए और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या Cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
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