देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी, चेक करें अपने शहर का रेट

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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। करीब दो साल बाद हुए इस इजाफे से परिवहन, खेती और घरेलू खर्चों पर असर पड़ने की संभावना है।

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में 3-3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया है। नई दरें 15 मई से लागू हो गई हैं। राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। इसके साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में अब एक किलो सीएनजी के लिए 79.09 रुपए चुकाने होंगे। करीब दो साल बाद ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है। खासतौर पर परिवहन, खेती और घरेलू जरूरतों पर इसका असर दिखाई देगा।


डीजल महंगा होने से बढ़ेगी रोजमर्रा की लागत

डीजल की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर माल ढुलाई और खेती पर पड़ता है। ट्रकों और टेंपो का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो सकते हैं। किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और इसका असर अनाज की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। वहीं बस, ऑटो और स्कूल वाहनों का किराया भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। कई शहरों में ट्रांसपोर्ट यूनियन ने भी किराया संशोधित करने के संकेत दिए हैं। ऐसे में आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।


कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। सरकारी तेल कंपनियों का दावा है कि उन्हें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को पूरी तरह घाटे से बाहर आने के लिए अभी और कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में और इजाफा देखने को मिल सकता है।


चुनाव से पहले मिली थी राहत, अब फिर बढ़ा बोझ

मार्च 2024 से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर थीं। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने जनता को राहत देते हुए ईंधन के दाम में 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके अलावा केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में भी 10-10 रुपए तक की कमी की थी ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े। सरकार का कहना था कि पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल 15 से 20 फीसदी तक महंगा हो चुका था, लेकिन भारत में दाम नियंत्रित रखे गए। अब तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे और वैश्विक हालात को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल ही में पेट्रोल और डीजल का सीमित उपयोग करने की अपील कर चुके हैं।

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