पांच दिन में दूसरी मार, पेट्रोल-डीजल फिर हुआ महंगा, कई जिलों में किल्लत से हाहाकार, जानिए आपके शहर में क्या है रेट
- Shiv Kumar
- 19 May, 2026
देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। 19 मई से तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इससे पहले 15 मई को भी दोनों ईंधनों की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। लगातार दूसरी बार हुई बढ़ोतरी के बाद कई राज्यों में इसका असर दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान के कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं। महराजगंज में लोग रातभर पेट्रोल पंपों के बाहर इंतजार करते नजर आए। कई लोगों ने तो वहीं मच्छरदानी लगाकर रात बिताई ताकि सुबह तेल मिल सके। जिले के कई पेट्रोल पंप बंद होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। वहीं बस्ती और संतकबीर नगर में बाइक चालकों को केवल 200 रुपए और कार चालकों को 1000 रुपए तक का ही पेट्रोल दिया जा रहा है।
तेल की कमी से कई शहरों में बढ़ी दिक्कतें
बिहार के जमुई में भी पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में तेल दिया जा रहा है। लोग घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। राजस्थान के पाली में पेट्रोल पंप पर डीजल भरवाने को लेकर विवाद हो गया। ड्रम में डीजल देने से मना करने पर कुछ युवकों ने पंप संचालक और कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की और ऑफिस के शीशे तोड़ दिए। घटना के बाद नाराज पेट्रोल पंप संचालकों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिससे मंगलवार सुबह कई पंप बंद रहे। तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल, सब्जियां और राशन के दाम बढ़ सकते हैं। किसानों के लिए खेती की लागत भी बढ़ेगी क्योंकि ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने में ज्यादा डीजल खर्च होगा। इसके अलावा ऑटो, बस और स्कूल वाहनों का किराया भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने का असर
जानकारों के मुताबिक ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय से कीमतें स्थिर रखे जाने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था। यही वजह है कि कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया। सरकार का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर इजाफा हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से ईंधन का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से करने की अपील की थी।
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