दुनिया में कौन सी कंपनी बनाती है सबसे ज्यादा ईवी बैटरी, भारत की क्या है स्थिति? जानें सबकुछ यहां

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दुनिया में EV बैटरी निर्माण में चीन की कंपनियों CATL और BYD का दबदबा है। वहीं भारत अभी बैटरी सेल निर्माण में शुरुआती चरण में है, लेकिन सरकार की PLI स्कीम और बड़ी कंपनियों के निवेश से देश तेजी से EV बैटरी मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नई दिल्ली। दुनियाभर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स यानी EV का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की जगह अब इलेक्ट्रिक कारें और स्कूटर लेते जा रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा चर्चा जिस चीज की हो रही है, वह है EV बैटरी। क्योंकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों का पूरा सिस्टम बैटरी पर ही निर्भर करता है। जिस तरह पहले ऑटो इंडस्ट्री में इंजन बनाने वाली कंपनियों का दबदबा हुआ करता था, उसी तरह अब EV दौर में बैटरी बनाने वाली कंपनियां सबसे ताकतवर बन चुकी हैं। साल 2025 में दुनियाभर में EV बैटरियों की खपत 31.7 प्रतिशत बढ़कर 1187 GWh तक पहुंच गई। इस पूरे बाजार में चीन की कंपनियों का दबदबा साफ नजर आता है। खास बात यह है कि दुनिया की सिर्फ दो चीनी कंपनियां अकेले आधे से ज्यादा ग्लोबल EV बैटरी मार्केट पर कब्जा जमाए बैठी हैं। वहीं भारत अभी इस रेस में शुरुआती दौर में है, लेकिन सरकार की नई योजनाओं और बड़ी कंपनियों के निवेश से तस्वीर धीरे-धीरे बदलती दिखाई दे रही है।


CATL और BYD का दुनिया में दबदबा

ईवी बैटरी बनाने के मामले में चीन की कंपनी CATL दुनिया में नंबर-1 पर है। कंपनी का ग्लोबल मार्केट शेयर करीब 39.2 प्रतिशत बताया जा रहा है। दुनिया की कई बड़ी कार कंपनियां अपनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों में CATL की बैटरियां इस्तेमाल करती हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर चीन की ही कंपनी BYD है, जिसका बाजार में करीब 16.4 प्रतिशत हिस्सा है। BYD की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह सिर्फ बैटरी नहीं बनाती, बल्कि खुद दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनियों में शामिल है। चीन की कुल छह कंपनियां दुनिया की टॉप-10 EV बैटरी कंपनियों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के पास सस्ते कच्चे माल और LFP यानी लिथियम आयरन फॉस्फेट तकनीक की मजबूत पकड़ होने के कारण उसका दबदबा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि दक्षिण कोरिया की LG Energy Solution, Samsung SDI और जापान की Panasonic जैसी कंपनियां भी इस रेस में बनी हुई हैं।


भारत अभी बैटरी सेल बनाने में पीछे

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बैटरी निर्माण के मामले में देश अभी पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है। फिलहाल भारत में ज्यादातर कंपनियां बाहर से बैटरी सेल मंगाकर यहां बैटरी पैक तैयार करती हैं। यानी बैटरी का सबसे अहम हिस्सा अभी भी चीन और दूसरे देशों से आयात किया जाता है। हालांकि केंद्र सरकार ने इसे बदलने के लिए करीब 18,100 करोड़ रुपये की PLI स्कीम शुरू की है। इसका मकसद भारत में ही बड़े स्तर पर बैटरी सेल निर्माण शुरू करना है। अब देश में कई बड़ी कंपनियां गीगाफैक्ट्रियां लगाने में जुटी हुई हैं। इससे आने वाले समय में भारत की विदेशी निर्भरता कम हो सकती है और EV की कीमतें भी नीचे आ सकती हैं।


भारत में तेजी से बढ़ रहा EV बैटरी सेक्टर

टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा अग्रतास गुजरात में बड़ा लिथियम-आयन सेल प्लांट बना रही है। इसका फायदा टाटा मोटर्स की इलेक्ट्रिक कारों को मिलेगा। ओला इलेक्ट्रिक भी तमिलनाडु में अपनी बड़ी सेल फैक्ट्री तैयार कर रही है और कंपनी ने भारत में डिजाइन किया गया 4680 भारत सेल भी पेश किया है। रिलायंस न्यू एनर्जी, एक्साइड एनर्जी सॉल्यूशन और अमारा राजा जैसी कंपनियां भी EV बैटरी सेक्टर में तेजी से निवेश कर रही हैं। हुंडई और किआ जैसी विदेशी कंपनियों ने भी भारत में सस्ते LFP सेल्स बनाने के लिए साझेदारी शुरू कर दी है। वहीं तोशिबा, डेंसो और सुजुकी का संयुक्त उपक्रम TDS गुजरात में बैटरी से जुड़े जरूरी पार्ट्स तैयार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह निवेश इसी तरह जारी रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में भारत भी ग्लोबल EV बैटरी मार्केट में मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।

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