बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, 10 प्रतिशत फ्यूल सरर्चाज पर नियामक आयोग सख्त, आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन से सात दिनों में मांगा जवाब
- Shiv Kumar
- 02 Jun, 2026
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। बिजली बिलों में 10 फीसदी ईंधन अधिभार जोड़ने के पावर कॉर्पोरेशन के फैसले पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस वसूली को प्रथम दृष्टया नियमों के विपरीत माना है और पावर कॉर्पोरेशन को सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। आयोग के इस कदम के बाद माना जा रहा है कि फिलहाल उपभोक्ताओं से 10 फीसदी अतिरिक्त राशि की वसूली पर रोक लग सकती है। इस मामले ने लाखों घरेलू और व्यावसायिक बिजली उपभोक्ताओं के बीच राहत की उम्मीद पैदा कर दी है, क्योंकि जून माह के बिजली बिलों में अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका जताई जा रही थी।
1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाये जोड़ने पर उठा विवाद
दरअसल, पावर कॉर्पोरेशन ने मार्च 2026 के ईंधन अधिभार के रूप में 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया था। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के समक्ष लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल कर आरोप लगाया कि कॉर्पोरेशन ने मार्च माह की वास्तविक बिजली खरीद लागत के अलावा करीब 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाये और पूर्व देनदारियों को भी गणना में शामिल कर लिया। उनका कहना था कि इससे उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। परिषद ने आयोग से हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की थी। इसी शिकायत के आधार पर आयोग ने पूरे मामले की सुनवाई शुरू की।
आयोग बोला- नियमों के अनुरूप नहीं है गणना
सुनवाई के दौरान आयोग ने स्पष्ट टिप्पणी की कि पिछली अवधि के बकाये और देनदारियों को वर्तमान फ्यूल पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) की गणना में शामिल करना विनियम 16.1 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। आयोग ने कहा कि कॉर्पोरेशन की सभी देनदारियों को एक साथ जोड़कर उपभोक्ताओं पर वित्तीय भार डालना उचित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर पावर कॉर्पोरेशन को नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। साथ ही वर्तमान और पूर्व अवधि की बिजली खरीद लागत तथा ट्रांसमिशन शुल्क का पूरा ब्यौरा भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब मिलने के बाद आयोग अंतिम फैसला सुनाएगा।
उपभोक्ता परिषद ने फैसले का किया स्वागत
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के रुख का स्वागत करते हुए कहा कि नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि आयोग की टिप्पणियों से साफ हो गया है कि ईंधन अधिभार की गणना में गंभीर अनियमितताएं थीं। यदि यह अतिरिक्त शुल्क लागू हो जाता तो प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता। अब सभी की निगाहें पावर कॉर्पोरेशन के जवाब और आयोग के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि उपभोक्ताओं को पूरी राहत मिलती है या नहीं।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






