शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका, सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 23, 200 के नीचे फिसला

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वैश्विक बाजारों में कमजोरी, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज हुई। सेंसेक्स 645 अंक टूटा, निफ्टी 23,200 के नीचे फिसला। आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।

भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का कारोबारी सत्र बेहद निराशाजनक रहा। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते बाजार में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,200 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता कम होने और मुनाफावसूली बढ़ने से अधिकांश सेक्टर दबाव में दिखाई दिए। बाजार की इस कमजोरी का असर रुपये पर भी पड़ा, जो डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर कारोबार करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


वैश्विक संकेतों ने बढ़ाया दबाव

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 645.51 अंकों की गिरावट के साथ 73,597.83 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 199.80 अंक टूटकर 23,166.90 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। जापान, चीन, हांगकांग और ऑस्ट्रेलिया समेत प्रमुख एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा, जिसने वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया। इसके अलावा अमेरिकी बाजारों में टेक शेयरों की कमजोरी का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला।


आईटी, ऑटो और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव

बाजार की गिरावट में आईटी, ऑटो, रियल्टी और मेटल कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। निवेशकों ने इन सेक्टरों में जमकर मुनाफावसूली की। दूसरी ओर फार्मा, हेल्थकेयर और मीडिया सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार का मनोबल कमजोर किया। आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे दबाव और बढ़ गया।


कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं। तेल महंगा होने से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। बाजार जानकारों का कहना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करना चाहिए।

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