पियूष गोयल ने फ्रांस में यूपीआई की शुरुआत की, भारत-फ्रांस डिजिटल भुगतान साझेदारी को मिला नया आयाम

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पियूष गोयल ने फ्रांस में यूपीआई लॉन्च कर भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को यूरोप में नई पहचान दिलाई। इस कदम से भारतीय यात्रियों और कारोबारियों को फ्रांस में तेज, सुरक्षित और आसान भुगतान की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पेरिस। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने फ्रांस में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस कदम को भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए बड़ा विस्तार माना जा रहा है, क्योंकि अब भारतीय पर्यटक और कारोबारी फ्रांस में भी उसी तरह तेज और आसान भुगतान कर सकेंगे, जैसा वे देश में करते हैं। सूत्रों के मुताबिक लॉन्च के मौके पर भारतीय डिजिटल सिस्टम की पहुंच बढ़ाने और उसे वैश्विक भुगतान नेटवर्क से जोड़ने पर खास जोर दिया गया। यह पहल सिर्फ तकनीकी सुविधा भर नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल साख का भी प्रदर्शन है।

फ्रांस में भारतीय डिजिटल भुगतान का नया रास्ता

जानकारी के मुताबिक यूपीआई को फ्रांस में लाने का मकसद वहां भारतीयों के लिए लेन-देन को सरल बनाना है। अब होटल, रेस्टोरेंट, दुकानों और अन्य सेवाओं में भुगतान की प्रक्रिया पहले से ज्यादा सहज हो सकती है। भारतीय यात्रियों को विदेशी कार्ड या नकद पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कारोबारियों के लिए भी यह सुविधा अहम है, क्योंकि फ्रांस में भारत से जुड़े व्यापारिक दौरे लगातार बढ़ रहे हैं। डिजिटल भुगतान के इस विस्तार को भारत के उस प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत यूपीआई को एशिया के बाद यूरोप में भी स्वीकार्य बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

भारत की डिजिटल कहानी को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच

यूपीआई आज भारत की सबसे सफल भुगतान प्रणालियों में गिना जाता है और देश में छोटी-बड़ी हर तरह की खरीदारी में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। विदेशों में इसका विस्तार भारत के फिनटेक मॉडल की विश्वसनीयता भी बढ़ाता है। पियूष गोयल के इस लॉन्च के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि भारतीय तकनीक अब सिर्फ घरेलू सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी विकल्प बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समझौते भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को नई मजबूती देंगे और विदेशी बाजारों में यूपीआई की पकड़ धीरे-धीरे और व्यापक हो सकती है।

यात्रियों, कारोबारियों और अगली कड़ियों पर नजर

इस पहल का सीधा असर उन भारतीयों पर पड़ेगा जो फ्रांस में पढ़ाई, पर्यटन या कारोबार के सिलसिले से जाते हैं। भुगतान में लगने वाला समय घटेगा और मुद्रा विनिमय की झंझट भी कम हो सकती है। इसके साथ ही फ्रांस में भारतीय समुदाय के लिए भी रोजमर्रा के लेन-देन में राहत मिलेगी। माना जा रहा है कि अगर यह मॉडल सफल रहा तो अन्य यूरोपीय देशों में भी यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ाने पर बातचीत तेज हो सकती है। भारत लगातार विदेशी भुगतान नेटवर्क के साथ अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को जोड़ने की कोशिश कर रहा है और फ्रांस में यह शुरुआत उसी कड़ी का अहम पड़ाव मानी जा रही है।

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