एथेनॉल फ्यूल में चींटियां लगने का वायरल वीडियो फर्जी, सरकार ने किया दावा खारिज, पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने की बात भी गलत बताई
- Shiv Kumar
- 24 Jun, 2026
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर बनाए जा रहे ईंधन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता है और इसे लेकर फैलाया जा रहा भ्रम आधारहीन है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस ईंधन की गुणवत्ता और प्रभाव पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
वायरल वीडियो पर सरकार की प्रतिक्रिया
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें ईंधन टैंक के आसपास चींटियां दिखाई देने का दावा किया गया था और इसे एथेनॉल से जोड़ा गया था। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल में किसी भी प्रकार की चीनी नहीं होती, इसलिए इस तरह के दावे वैज्ञानिक रूप से गलत हैं। मंत्रालय ने कहा कि कई पुराने वीडियो और तस्वीरों को गलत तरीके से दोबारा शेयर कर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। सरकार ने साफ किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन पर किसी तरह के नुकसान की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
बीमा और सुरक्षा को लेकर भी स्पष्टता
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने पर वाहन बीमा की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। कुछ भ्रामक संदेशों में यह दावा किया जा रहा था कि इस ईंधन के कारण इंश्योरेंस कवर प्रभावित हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह गलत बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का लंबे समय से सफल उपयोग हो रहा है और भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
किसानों और अर्थव्यवस्था को मिल रहा लाभ
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एथेनॉल कार्यक्रम के चलते देश को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, क्योंकि कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। इसके साथ ही गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय को भी समर्थन मिला है। सरकार का कहना है कि यह पहल न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रही है बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करने में मददगार साबित हो रही है।
एथेनॉल कैसे तैयार होता है
एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे प्राकृतिक रूप से शर्करा और स्टार्च के किण्वन से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर वाहनों में उपयोग किया जाता है ताकि प्रदूषण कम हो सके और ईंधन की वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत हो। इसे गन्ना, मक्का, चावल की भूसी, आलू और अन्य जैविक पदार्थों से तैयार किया जाता है।
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