पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से सहमा बाजार, सेंसेक्स 650 अंक तक टूटा, निफ्टी 24, 000 के करीब फिसला

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखा। सोमवार को सेंसेक्स 650 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,000 के करीब फिसल गया। ऑटो और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई।

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 650 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के अहम स्तर के करीब पहुंच गया। सुबह 9:41 बजे सेंसेक्स 446.48 अंक (0.57%) गिरकर 77,122.91 और निफ्टी 137.21 अंक (0.57%) टूटकर 24,069.70 पर कारोबार कर रहा था। वहीं रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली और यह डॉलर के मुकाबले 34 पैसे गिरकर 95.72 पर पहुंच गया।


ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली, तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता

सोमवार के कारोबार में सबसे अधिक दबाव ऑटो और मेटल सेक्टर पर रहा। इन सेक्टरों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स में इंटरग्लोब एविएशन, टाटा स्टील, मारुति, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और बजाज फिनसर्व प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। हालांकि टीसीएस, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और पावर ग्रिड जैसे कुछ शेयरों में सीमित बढ़त दर्ज की गई। इस बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.96% बढ़कर 79.02 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जिससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका भी मजबूत हुई।


पश्चिम एशिया के तनाव ने बढ़ाया दबाव, वैश्विक बाजारों में भी गिरावट

बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद किए जाने की खबर रही। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। एशियाई बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग सहित अधिकांश प्रमुख बाजार लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि, कुछ समय के लिए हैंग सेंग इंडेक्स ने सीमित बढ़त दर्ज की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी जारी रहेगा।


विश्लेषकों की राय, उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय बाजार की लंबी अवधि की तस्वीर मजबूत

हालांकि निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन विशेषज्ञ भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती को लेकर आश्वस्त हैं। उनका मानना है कि वैश्विक हालात सामान्य होने और घरेलू आर्थिक संकेतकों के मजबूत बने रहने पर भारतीय शेयर बाजार फिर से रिकवरी कर सकता है। शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 2,603.72 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी, जो भारतीय बाजारों में निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

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