सुप्रीम कोर्ट में अनुशासन को लेकर बड़ा कदम, हंगामा और पेपर फेंकने की घटनाओं के बाद बदले गए कोर्टरूम नियम

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सुप्रीम कोर्ट ने कोर्टरूम में हंगामे की घटनाओं के बाद खुद अपने केस की पैरवी करने वाले लोगों के लिए नए नियम तय किए हैं। अब ऐसे लोगों को पहले वर्चुअल सुनवाई का विकल्प मिलेगा। फिजिकल पेशी की स्थिति में लाइव-स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कोर्टरूम की व्यवस्था और गरिमा बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब अपने मामलों की पैरवी खुद करने वाले लोगों के लिए कुछ नए नियम लागू किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट की फुल बेंच ने फैसला किया है कि ऐसे लोगों को पहले वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति कोर्टरूम में आकर फिजिकल रूप से अपनी बात रखना चाहता है तो उसे लाइव-स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हाल ही में कोर्टरूम में हुई हंगामे की घटना के बाद लिया है। अदालत का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखना और किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकना है।


हंगामे की घटना के बाद फुल बेंच ने लिया फैसला

सुप्रीम कोर्ट की फुल बेंच ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 के तहत यह निर्णय लिया। कोर्ट की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि खुद अपने केस की पैरवी करने वाले लोगों को पहले वर्चुअल माध्यम से अपनी बात रखने का विकल्प दिया जाएगा। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति कोर्टरूम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने पर जोर देता है तो उस स्थिति में सुनवाई का लाइव प्रसारण नहीं किया जाएगा और वीडियो रिकॉर्डिंग की अनुमति भी नहीं होगी। यह फैसला 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच में हुई घटना के बाद आया है। उस दौरान खुद अपना केस लड़ने पहुंचे एक व्यक्ति ने कोर्टरूम में हंगामा किया था। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक पर कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित मारपीट करने का आरोप भी लगाया गया था।


अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए उठाया कदम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नए नियमों का उद्देश्य आम लोगों को न्याय तक पहुंच से रोकना नहीं है, बल्कि अदालत की कार्यवाही को व्यवस्थित और सम्मानजनक बनाए रखना है। कोर्ट का मानना है कि लाइव-स्ट्रीमिंग के दौरान होने वाली अनुचित घटनाओं का प्रसारण न्यायपालिका की छवि को प्रभावित कर सकता है। इसलिए फिजिकल पेशी के दौरान रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग बिना वकील के अपने मामलों की पैरवी करना चाहते हैं, उन्हें नियमों के तहत उचित अवसर दिया जाएगा। लेकिन कोर्टरूम में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी होगी।


सीजेआई को अपशब्द कहने की घटना के बाद बढ़ी सतर्कता

दरअसल, पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-13 में अपने मामले की पैरवी करने पहुंचे एक व्यक्ति ने कथित तौर पर हंगामा किया था। आरोप है कि उसने जजों के साथ अमर्यादित व्यवहार किया, आदेश देने की शैली में बात की और कागज भी फेंके। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों को उसे कोर्टरूम से बाहर ले जाना पड़ा। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आरोपी की स्थिति को देखते हुए अवमानना की कार्रवाई नहीं चलाने का फैसला लिया। इससे पहले भी कोर्ट परिसर में अनुशासन से जुड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं।

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