दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- वांगचुक को इलाज के लिए ले जाना गलत नहीं, केंद्र और पुलिस से 3 दिन में मांगा जवाब, अगली सुनवाई गुरुवार को
- Shiv Kumar
- 19 Jul, 2026
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल उन्हें सरकारी अस्पताल से स्थानांतरित करने का कोई आदेश नहीं दिया। अदालत ने कहा कि वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और पहले से दिए गए न्यायिक निर्देशों के आधार पर उन्हें अस्पताल ले जाने की सरकारी कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता। मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को तीन दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी पर जताया भरोसा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सोनम वांगचुक की सेहत पर विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार नजर रख रहे हैं और उन्हें केवल वही दवाएं व उपचार दिए जा रहे हैं, जिनके लिए उन्होंने सहमति दी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वांगचुक किसी पुलिस हिरासत में नहीं हैं और उनके परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी नागरिक के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है और मौजूदा परिस्थितियों में अस्पताल ले जाने के फैसले को गलत नहीं माना जा सकता।
निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग पर बहस
वांगचुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। उनका कहना था कि मेडिकल रिकॉर्ड में ऐसी कोई स्थिति सामने नहीं आई, जिससे जबरन अस्पताल ले जाने की जरूरत साबित होती हो। दूसरी ओर सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो सकती थी। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटैशियम की कमी जैसी परिस्थितियों को देखते हुए समय रहते चिकित्सकीय निगरानी जरूरी थी।
भूख हड़ताल जारी, इलाज पर बनी सहमति
एम्स के डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक ने शुगर-फ्री ओआरएस और कुछ दवाएं लेना शुरू किया है, लेकिन अब भी नस के जरिए तरल पदार्थ लेने से इनकार कर रहे हैं। डॉक्टरों ने अदालत से जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सकीय हस्तक्षेप की अनुमति देने का अनुरोध किया। वहीं सरकार ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो उन्हें एम्स स्थानांतरित करने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। सोनम वांगचुक और CJP के कार्यकर्ता 28 जून से NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं।
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