IIT मद्रास ने छात्रों से जंतर-मंतर समर्थन वाले इंस्टाग्राम वीडियो हटाने को कहा
जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन वाले Instagram वीडियो हटाने को IIT Madras ने कहा, सोशल मीडिया पर छिड़ा नया विवाद
- Babli Ansari
- 23 Jul, 2026
जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का असर अब देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच गया है। IIT मद्रास प्रशासन ने छात्र संगठन ChintaBAR को निर्देश दिया है कि वह अपने आधिकारिक Instagram अकाउंट से जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में साझा किए गए वीडियो और पोस्ट हटा दे। रिपोर्ट के मुताबिक यह निर्देश संस्थान के डीन और संबंधित फैकल्टी एडवाइजर की ओर से दिया गया। वीडियो में छात्रों के आंदोलन, भूख हड़ताल और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का समर्थन किया गया था। इस फैसले के बाद कैंपस और सोशल मीडिया दोनों जगह नई बहस शुरू हो गई है।
संस्थान ने नियमों का हवाला दिया
जानकारी के अनुसार IIT मद्रास प्रशासन का कहना है कि मान्यता प्राप्त छात्र संगठनों को संस्थान के नियमों और आचार संहिता का पालन करना होता है। प्रशासन का मानना है कि आधिकारिक छात्र निकायों के सोशल मीडिया मंचों का उपयोग राजनीतिक या विवादित अभियानों के समर्थन के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसी आधार पर संबंधित पोस्ट हटाने के लिए कहा गया। हालांकि संस्थान की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
छात्र संगठन ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर छात्र संगठन ने इस निर्देश पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि साझा किया गया वीडियो शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मुद्दों पर एकजुटता व्यक्त करने के उद्देश्य से था, न कि किसी राजनीतिक अभियान के लिए। उनका कहना है कि छात्रों को सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर अपनी राय रखने का अधिकार है। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग संस्थान के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।
देशभर में बढ़ रही बहस
जंतर-मंतर आंदोलन को लेकर देश के कई शैक्षणिक संस्थानों में चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर छात्रों की गतिविधियों और संस्थानों की नीतियों को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। ऐसे में IIT मद्रास का यह फैसला भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि छात्र संगठन इस निर्देश का पालन करता है या मामले को आगे उठाता है। वहीं शिक्षा जगत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत अनुशासन के बीच संतुलन को लेकर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






