तबीयत बिगड़ने पर जंतर-मंतर धरने से हटे CJP प्रमुख अभिजीत दीपके, कुछ घंटे की आराम की अपील

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जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन के बीच अभिजीत दीपके की तबीयत बिगड़ी। तेज बुखार और शरीर दर्द के चलते उन्होंने कुछ घंटे आराम की बात कही।

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने खराब स्वास्थ्य के कारण कुछ समय के लिए धरना स्थल छोड़ दिया। डिपके ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें तेज बुखार और पूरे शरीर में दर्द की शिकायत थी। उन्होंने कहा कि अब तक वह दर्द निवारक दवाओं के सहारे आंदोलन में डटे हुए थे, लेकिन डॉक्टरों की सलाह के बाद कुछ घंटों का आराम लेना जरूरी हो गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन से पीछे हटना नहीं है और स्वास्थ्य में सुधार होते ही वह फिर धरना स्थल पर लौटेंगे।

'आंदोलन रुकेगा नहीं', समर्थकों को दिया संदेश

धरना स्थल छोड़ने से पहले अभिजीत डिपके ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी अनुपस्थिति से आंदोलन की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि उनकी मुख्य मांगें अभी भी वही हैं—परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में जवाबदेही और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई। डिपके ने भरोसा जताया कि आंदोलन सामूहिक है और किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है।

स्वास्थ्य बिगड़ने की वजह बना लगातार आंदोलन

सूत्रों के अनुसार, पिछले कई दिनों से लगातार धरने, बैठकों और समर्थकों से मुलाकात के कारण अभिजीत डिपके को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाया था। उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि वह लगातार दर्द की दवा लेकर आंदोलन में शामिल हो रहे थे। डॉक्टरों ने उन्हें कुछ समय विश्राम करने की सलाह दी है ताकि स्वास्थ्य और अधिक न बिगड़े। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि आंदोलन के संचालन की जिम्मेदारी संगठन की टीम संभाल रही है और सभी कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार जारी रहेंगे।

जंतर-मंतर पर धरना जारी, नजरें अगले कदम पर

अभिजीत डिपके के अस्थायी रूप से हटने के बावजूद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। संगठन ने दोहराया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा। फिलहाल समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों की नजर इस बात पर है कि डिपके कब स्वास्थ्य लाभ लेकर दोबारा धरना स्थल पर लौटते हैं। वहीं सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी चर्चा जारी है

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