अब कोर्ट की क्लिप वायरल की तो होगी कार्रवाई! सुप्रीम कोर्ट ने लगाया बड़ा बैन
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो क्लिप्स को सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना अनुमति साझा करने पर सख्ती दिखाई है। अब पोस्ट, रीपोस्ट, अपलोड और मोनेटाइजेशन के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी।
- Babli Ansari
- 24 Jul, 2026
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की गरिमा बनाए रखने के लिए बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट की सुनवाई से जुड़ी ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म या अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर पोस्ट, अपलोड, रीपोस्ट या प्रसारित नहीं किया जा सकेगा। अदालत ने कहा कि संबंधित सुप्रीम कोर्ट या संबंधित हाईकोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की रिकॉर्डिंग साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। यह आदेश कोर्ट की कार्यवाही के दुरुपयोग और भ्रामक प्रस्तुति को रोकने के उद्देश्य से दिया गया है।
'कोर्ट कोई मनोरंजन का मंच नहीं'
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि "अदालत कोई 24 घंटे चलने वाला मनोरंजन चैनल नहीं है।" न्यायालय ने कहा कि हाल के समय में अदालत की कार्यवाही के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप काटकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं, जिनसे कई बार सुनवाई का वास्तविक संदर्भ बदल जाता है। इससे न्यायिक प्रक्रिया की गलत तस्वीर सामने आती है और लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए भी निर्देश
अंतरिम आदेश में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि बिना अधिकृत अनुमति के न्यायिक कार्यवाही से जुड़े वीडियो को प्लेटफॉर्म पर प्रसारित, संग्रहित, अपलोड या रीपोस्ट नहीं किया जाना चाहिए। यह आदेश केवल व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन डिजिटल माध्यमों पर भी लागू होगा जहां इस तरह की सामग्री साझा की जाती है। अदालत का मानना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुरक्षित रहेगी।
अदालत की गरिमा बनाए रखना उद्देश्य
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि न्यायिक कार्यवाही को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किए जाने और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है। अदालत ने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग और अधिकृत रिकॉर्डिंग की अपनी व्यवस्था मौजूद है, लेकिन उन रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। फिलहाल यह आदेश अंतरिम रूप से लागू रहेगा और मामले की अगली सुनवाई में इस पर आगे विचार किया जाएगा।
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