ग्रीन पटाखों पर नया विवाद, CPCB ने जताई आपत्ति; अब सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला
ग्रीन पटाखों की कमर्शियल प्रोडक्शन इजाजत को लेकर केंद्र के दो प्रमुख संस्थान आमने-सामने आ गए हैं। CPCB ने बैन रसायन के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई, जबकि मामला अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंच गया है।
- Babli Ansari
- 27 Jul, 2026
नई दिल्ली। दीवाली से पहले ग्रीन पटाखों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने नई पीढ़ी के कुछ ग्रीन पटाखों पर गंभीर आपत्ति जताई है। बोर्ड का कहना है कि इन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट जैसे रसायन का इस्तेमाल किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही बेरियम आधारित रसायनों के उपयोग पर रोक लगा चुका है। ऐसे में CPCB ने इन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति देने पर सवाल उठाए हैं।
दो सरकारी एजेंसियों की अलग-अलग राय
मामले में दो सरकारी संस्थाओं की रिपोर्ट एक-दूसरे से अलग है। CSIR-NEERI ने दावा किया है कि नई तकनीक से तैयार किए गए ग्रीन पटाखों से PM10 और PM2.5 जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन 40 से 60 प्रतिशत तक कम होता है। इसी आधार पर उसने इनके व्यावसायिक उत्पादन की सिफारिश की है। दूसरी ओर CPCB का कहना है कि यदि इनमें प्रतिबंधित रसायन मौजूद हैं, तो इन्हें अनुमति देना सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का उल्लंघन होगा।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ा फैसला
दोनों एजेंसियों की विरोधाभासी राय के बाद केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने रख दिया है। पर्यावरण मंत्रालय ने अदालत को बताया कि नए ग्रीन पटाखों के फॉर्मूले को PESO से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुका है, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत ही ले। अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि इन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन और बिक्री की अनुमति दी जाए या नहीं।
दीवाली से पहले अहम फैसला संभव
ग्रीन पटाखों को लेकर आने वाला फैसला पटाखा उद्योग, पर्यावरण और त्योहारों से जुड़ी तैयारियों पर सीधा असर डाल सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट CPCB की आपत्तियों को सही मानता है तो नए ग्रीन पटाखों का उत्पादन रुक सकता है। वहीं, यदि अदालत NEERI की सिफारिशों को स्वीकार करती है तो कम प्रदूषण वाले पटाखों के निर्माण का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है।
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