हिमाचल में भारी बारिश से जनजीवन ठप, कई जिलों में सड़कें बंद और अलर्ट जारी
- Babli Ansari
- 31 Jul, 2026
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की लगातार मार ने जनजीवन फिर से बुरी तरह हिला दिया है। कई जिलों में भूस्खलन, मलबा और तेज बहाव के चलते सड़कों की आवाजाही बाधित है, जबकि बिजली और पेयजल आपूर्ति पर भी सीधा असर पड़ा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के ताजा बुलेटिन के मुताबिक दर्जनों सड़कें अभी भी बंद हैं और मरम्मत दल लगातार काम में जुटे हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए कई इलाकों में भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई है। राहत की बात बस इतनी है कि कुछ जगहों पर बहाली का काम आगे बढ़ा है, लेकिन लगातार बरसात से हालात फिर बिगड़ते जा रहे हैं।
सड़कों पर सबसे ज्यादा दबाव
जानकारी के मुताबिक राज्य में कई मुख्य और संपर्क मार्ग मलबे से बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। किन्नौर, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, कांगड़ा और लाहौल-स्पीति के कुछ हिस्सों में सड़कें खोलने का काम चल रहा है, लेकिन लगातार बारिश के कारण मशीनरी को बार-बार रोका जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि दिनभर में कुछ मार्गों को खोला भी गया, मगर नई स्लाइड और पत्थर गिरने से फिर अवरोध पैदा हो गया। जिन इलाकों में नदी-नालों का दबाव बढ़ा है, वहां एहतियातन यातायात सीमित किया जा रहा है। पहाड़ी ढलानों पर हालात खासे नाजुक बने हुए हैं और छोटे-छोटे संपर्क मार्ग अभी भी जोखिम में हैं।
राज्य के लोक निर्माण, बिजली और जल शक्ति विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य मशीनें लगातार संवेदनशील इलाकों में भेजी जा रही हैं ताकि मलबा हटाकर यातायात और सेवाएं बहाल की जा सकें। कई जगहों पर बिजली के ट्रांसफॉर्मर और पेयजल योजनाएं भी बारिश की चपेट में आई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सड़क बंद होने से मरम्मत सामग्री और राहत कर्मियों की पहुंच देर से हो रही है। प्रशासन की कोशिश है कि जरूरी सेवाएं पहले बहाल की जाएं, लेकिन मौसम का मिजाज अब भी सहयोग नहीं कर रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी और आगे की चिंता
मौसम विभाग ने हिमाचल में सक्रिय मानसून को लेकर चेतावनी और कड़ी कर दी है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और आसपास के जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। कुछ क्षेत्रों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जैसी स्थितियां भी बनी हुई हैं, जिससे प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पहाड़ी राज्यों में इस मौसम में अचानक बाढ़, भूस्खलन और नालों के उफान का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर ढलान वाले इलाकों में एक बार फिर नई तबाही की आशंका बनी हुई है, इसलिए यात्रा और निर्माण कार्यों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
सरकारी तंत्र ने जिला स्तर पर नियंत्रण कक्षों को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा है और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। स्कूलों, ग्रामीण संपर्क मार्गों और नदी किनारे बसे गांवों पर भी प्रशासन की नजर है। राहत और बचाव एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार समन्वय में हैं, लेकिन बारिश का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा। यही वजह है कि लोगों से अनावश्यक यात्रा टालने, फिसलन भरे रास्तों से दूर रहने और मौसम अपडेट पर नजर रखने की अपील की जा रही है। आने वाले 48 से 72 घंटे राज्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।
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