पैदल यात्रियों को मिली बड़ी राहत! SC ने बदल दिए नियम, फुटपाथ पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं |

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सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर पैदल चलने वालों के अधिकार को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि फुटपाथ और पैदल चलने की जगह अतिक्रमण मुक्त होनी चाहिए। अदालत ने साफ किया कि सुरक्षित और चिन्हित फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है

देशभर में फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण और पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि सड़क पर सुरक्षित तरीके से चलना और चिन्हित फुटपाथ का इस्तेमाल करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कें केवल मोटर वाहनों के लिए नहीं हैं, बल्कि पैदल यात्रियों के अधिकारों की भी समान रूप से रक्षा की जानी चाहिए। अदालत ने केंद्र, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि फुटपाथ अतिक्रमण मुक्त रहें और पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया जाए।

किस मामले में आया यह फैसला?

यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक छोटे बच्चे की मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि दुर्घटना स्थल पर न तो सुरक्षित फुटपाथ था और न ही पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था। इसी के बाद अदालत ने केवल मुआवजे तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे देश में पैदल यात्रियों के अधिकारों पर व्यापक टिप्पणी करते हुए इसे संवैधानिक महत्व का विषय माना। अदालत ने इस मुद्दे को आगे भी निगरानी में रखने का फैसला किया है।

सरकारों और नगर निकायों को क्या करना होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां सड़क होगी, वहां सुरक्षित और स्पष्ट रूप से चिन्हित फुटपाथ भी होना चाहिए। अदालत ने नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, नगरपालिकाओं और पंचायतों को फुटपाथ बनाने, उनकी नियमित देखरेख करने और उन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण न होने देने की जिम्मेदारी सौंपी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी नागरिक का पैदल चलने का अधिकार प्रभावित होता है, तो वह संबंधित सरकारी एजेंसी के खिलाफ कानूनी उपाय अपना सकता है।

नई व्यवस्था बनाने की भी सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मौजूदा कानून पैदल यात्रियों के अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करते। इसलिए अदालत ने केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और विधि आयोग से कहा है कि पैदल यात्रियों के अधिकारों और सुरक्षित फुटपाथों के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार किया जाए। अदालत ने एक प्रभावी नियामक व्यवस्था की जरूरत भी बताई, ताकि इन निर्देशों का पालन केवल कागजों तक सीमित न रहे।

देशभर के शहरों पर पड़ेगा असर

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर अब देश के सभी शहरों और कस्बों में देखने को मिल सकता है। जहां-जहां फुटपाथों पर अवैध कब्जे, पार्किंग या अन्य बाधाएं हैं, वहां स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ सकती है। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि सड़कों की योजना बनाते समय पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन होता है, तो भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने के साथ-साथ शहरों में पैदल चलना भी पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकता है।

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