केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन से 12 लोग फंसे, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ ने शुरू किया बचाव अभियान
- Babli Ansari
- 31 Oct, 2026
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के केदारताल ट्रेक मार्ग पर हिमस्खलन के बाद सात ट्रेकर समेत 12 लोग ऊंचाई वाले इलाके में फंस गए हैं। घटना के बाद जिला प्रशासन ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक दल में पश्चिम बंगाल के पांच और उत्तर प्रदेश के दो ट्रेकर शामिल हैं, जबकि पांच लोग स्थानीय सहायक स्टाफ के तौर पर उनके साथ थे। भारी बर्फबारी, ग्लेशियर की हलचल और लगातार बिगड़ते मौसम ने लौटने का रास्ता बंद कर दिया। प्रशासन ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को मौके की ओर रवाना किया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता सभी फंसे लोगों तक भोजन, दवाएं और जरूरी सामान पहुंचाने के साथ उन्हें सुरक्षित नीचे लाना है।
हिमस्खलन के बाद रास्ता बंद, दल से संपर्क की कोशिश
जिला आपातकालीन संचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, 13 सदस्यीय दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। योजना के मुताबिक इसे 29 अक्टूबर तक वापस लौटना था, लेकिन भोजखरक से आगे रास्ते में हिमस्खलन होने के बाद आवाजाही ठप हो गई। बर्फ खिसकने और मौसम खराब रहने से दल आगे भी नहीं बढ़ सका और नीचे लौटने का विकल्प भी बंद हो गया। बताया जा रहा है कि तीन पोर्टर और एक रसोइया काची ढांग के पास सुरक्षित पाए गए हैं, जबकि शेष लोग केदारताल क्षेत्र में फंसे हैं। बचाव दल को दुर्गम भूभाग और लगातार हो रही बर्फबारी के बीच आगे बढ़ना पड़ रहा है। प्रशासन स्थानीय गाइडों की मदद से सुरक्षित मार्ग तलाश रहा है।
ऊंचाई और मौसम ने बढ़ाई चुनौती
केदारताल उत्तरकाशी जिले का बेहद कठिन और ऊंचाई वाला ट्रेक माना जाता है। अक्टूबर के आखिर में यहां मौसम तेजी से करवट लेता है और बर्फबारी के बाद पगडंडियां पहचानना मुश्किल हो जाता है। इस बार ग्लेशियर क्षेत्र में हलचल और हिमस्खलन ने खतरा और बढ़ा दिया। अधिकारियों के मुताबिक, राहत टीमों की गति मौसम और रास्ते की स्थिति पर निर्भर करेगी। हेलीकॉप्टर से निगरानी या निकासी की संभावना पर भी परिस्थितियों के अनुसार फैसला लिया जा सकता है, लेकिन बादल और तेज हवाएं इसमें बाधा बन सकती हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं ने बताया कि सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम भेजी गई। राज्य सरकार ने ऊंचाई वाले इलाकों में पर्यटकों और ट्रेकरों की आवाजाही को मौसम चेतावनी के मद्देनजर नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं।
सभी को सुरक्षित निकालना प्रशासन की प्राथमिकता
फंसे लोगों के परिजनों में चिंता बढ़ी हुई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि बचाव अभियान में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के अलावा पुलिस, स्थानीय आपदा प्रबंधन कर्मी और प्रशिक्षित पर्वतीय गाइड भी अभियान में लगाए गए हैं। बचावकर्मी पहले सुरक्षित संपर्क स्थापित करने और फंसे लोगों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में जुटे हैं। इसके बाद उन्हें चरणबद्ध तरीके से नीचे लाने की योजना है। खराब मौसम के कारण अभियान धीमा पड़ सकता है, लेकिन टीमें मौके तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। अधिकारियों ने ट्रेकिंग एजेंसियों से मौसम पूर्वानुमान और अनुमति प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने को कहा है, ताकि आगे ऐसी घटनाओं का जोखिम कम किया जा सके।
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