यमुना प्राधिकरण जमीन घोटाला मामला; पूर्व OSD वीरपाल सिंह और तहसीलदार अजीत परेश के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

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आरोपी अफसरों ने रिश्तेदारों को ज़मीन किसानों से दिलवाई

Noida: नोएडा पुलिस ने 23.92 करोड़ के हाथरस जमीन घोटाले में यमुना प्राधिकरण के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान वाराणसी के मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) अजीत परेश,  पूर्व ओएसडी वीरपाल सिंह के खिलाफ एंटी करप्शन कोर्ट मेरठ में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने इस मामले में छठी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है। नोएडा के ACP प्रथम लैंड स्कैम की कर रहे जांच सौंपी गई है।  दोनों अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों की भूमिका पाई गई है। पुलिस की विवेचना में वीरपाल सिंह के रिश्तेदारों व करिबियों पर भी जमीन खरीद बिक्री के आरोप लगे हैं।

अफसरों ने रिश्तेदारों को ज़मीन किसानों से दिलवाई
इन्होंने अपने भांजे निर्दोष चौधरीदामाद नीरज तोमरसाले संजीवनौकर सत्येंद्र और समधी मदनपाल सिंह समधी के बेटे अजीत सिंह के नाम से जमीन सस्ते दाम पर खरीदारी कराई और उसका मुआवजा यमुना विकास प्राधिकरण द्वारा दिया गया। इस मामले में अब तक 16 आरोपियों के खिलाफ पुलिस आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जिनमें पांच सरकारी अधिकारी है।  घोटाले में तत्कालीन सीईओ PC  गुप्ता जमानत पर बाहर हैं।

जमीन अधिग्रहण कर अरबों रुपयों का किया घोटाला
एसीपी की विवेचना के बाद पुलिस टीम ने अजीत परेश व वीरपाल के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। पुलिस की जांच में पता चला कि जिस वक्त यमुना प्राधिकरण हाथरस में जमीन का अधिग्रहण कर रहा था। उस वक्त योजना के मुताबिक हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता थीलेकिन आरोपियों ने अधिक कमाई के लालच में पहले ही 14.5 हेक्टेयर जमीन किसानों से औने-पौने दाम में खरीद लिया। इसके बाद खुद यमुना प्राधिकरण से मुआवजा उठा लिया।

29 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
उल्लेखनीय है कि 2018 में यमुना प्राधिकरण में तैनात अधिकारियों ने हाथरस जनपद में बिना किसी प्लानिंग के प्राधिकरण की तरफ से जमीन का अधिग्रहण किया। जिससे यमुना प्राधिकरण को करोड़ों रुपए का घाटा हुआ। इस मामले में थाना बीटा-दो में मुकदमा दर्ज हुआ था। तत्कालीन सीईओ पीसी गुप्ता, एसीईओ सतीश कुमार, ओएसडी बीपी सिंह समेत 29 लोगों के खिलाफ  मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले में तत्कालीन सीईओ पीसी गुप्ता सहित कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

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