इंटरनेशनल पुलिस बनकर NRI से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा, जानिए कैसे बनाते थे लोगों को अपना शिकार?
- Shiv Kumar
- 20 Aug, 2025
Noida: थाना फेस-3 पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन का प्रतिनिधि बताकर लोगों को ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। 10 अगस्त को दर्ज हुए मुकदमे के बाद पश्चिम बंगाल के रहने वाले विभाष चन्द अधिकारी उसका बेटा अराग्य और बाबूल चन्द मंडल को गिरफ्तार किया गया था। इन आरोपियो को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर 19 अगस्त को उनकी निशानदेही पर महत्वपूर्ण बरामदगी की गई। विवेचना के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले।
ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया बनाते थे टारगेट
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह आमजन के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड धारकों को निशाना बनाता था। आरोपित उन्हें यह विश्वास दिलाते थे कि यदि वे "जांच" में सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें भारत आने की अनुमति नहीं मिलेगी और भविष्य में उनका OCI कार्ड भी रद्द कर दिया जाएगा। इस भय का फायदा उठाकर वे पीड़ितों से भारी धनराशि ऐंठते थे। इसके अलावा गैंग के सदस्य पीड़ितों को विश्वास दिलाने के लिए Microsoft Teams पर वीडियो कॉल करते थे, जिसमें वे खुद को विभिन्न अधिकारी बताकर पेश करते। उन्होंने सरकारी एजेंसियों जैसे क्राईम ब्रांच , CBI, ED और Supreme Court के नकली दस्तावेज दिखाकर भरोसा दिलाते थे।
बेगुनाही साबित करने के लिए सुपरविजन अकाउंट में मंगाते थे पैसा
आरोपियों ने बताया कि पीड़ित जब अपने आपको बेकसूर बताता था तो वह उसे कहते कि भारत आने के लिए और भविष्य में किसी भी जांच से बचने के लिए उसे भारत सरकार से पुलिस क्लीयिरेंस सर्टिफिकेट (PCC) प्राप्त करना होगा। जिसे वह दिला सकते हैं। इण्टरनेशनल मनी लोन्ड्रिंग केस में अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए पीड़ित को कुछ धनराशि CBI के "सुपरविजन अकाउंट" में भेजनी होगी तो उसका मनीरूट ट्रैक किया जाएगा और राशि शीघ्र वापस कर दी जाएगी। पैसे भेजने के बाद पीड़ित को एक Acknowledgement Letter भी दिया जाता था, जिस पर “Financial Department, CBI” और RBI की नकली सील लगी होती थी।
हवाला के जरिए भारत लाते थे पैसा
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह ठगी से प्राप्त धनराशि को पहले अंतरराष्ट्रीय खातों में ट्रांसफ़र करता है और उसके बाद हवाला नेटवर्क के ज़रिये उसे वापस भारत में रूट करता है। गिरोह नकली कॉल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फर्जी सरकारी दस्तावेजों, स्पूफ़िंग तकनीक, हवाला नेटवर्क, नकली CBI-RBI लेटरहेड और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी ऑर्डर का सहारा लेकर बड़े पैमाने पर ठगी करने में शामिल था। इस गिरोह द्वारा दूसरी सम्बद्ध संस्था नेशनल ब्यूरो ऑफ इन्वसेटिगेशन एंड सोशल जस्टिस के द्वारा आमजनता को पुलिस की तरह दिखने वाले सम्मन लैटर अथवा आदेश जारी किये जाते थे । सामग्री व प्रारूप को जानबूझकर वैध कानूनी सम्मन की तरह दिखने के लिए तैयार करते थे जिससे आमजन पर दबाव बने।
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