नोएडा प्राधिकरण में ट्रांसफर सिस्टम पर सवाल, तबादला आदेशों के बावजूद 15 साल से जमी एजीएम की कुर्सी
- Shiv Kumar
- 28 Jan, 2026
नोएडा प्राधिकरण में एक बार फिर ट्रांसफर सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राधिकरण में सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) के पद पर तैनात शोभा कुशवाहा पिछले करीब 15 वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमी हुई हैं। हैरानी की बात यह है कि शासन स्तर से उनका ट्रांसफर आदेश पहले ही जारी हो चुका है, बावजूद इसके अब तक उन्हें रिलीव नहीं किया गया। इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि शासन के आदेशों की अनदेखी को भी उजागर किया है।
कई बार हो चुका ट्रांसफर, लेकिन नहीं हुई रिलीविंग
सूत्रों के अनुसार एजीएम शोभा कुशवाहा का पूर्व में कानपुर ट्रांसफर आदेश जारी किया गया था। इसके बाद यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में भी उनकी तैनाती का आदेश हुआ, लेकिन हर बार आदेश कागजों तक ही सीमित रह गया। औद्योगिक विकास विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेशों में स्पष्ट रूप से नई तैनाती स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे, फिर भी उन्हें नोएडा प्राधिकरण से रिलीव नहीं किया गया। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा आम है कि आखिर किस वजह से लगातार ट्रांसफर आदेशों को लागू नहीं किया जा रहा।
सत्ता-संरक्षण और सेटिंग सिस्टम के आरोप
प्रकरण को लेकर यह आरोप भी लग रहे हैं कि सत्ता-संरक्षण के चलते ट्रांसफर आदेशों को दबा दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि क्या नोएडा प्राधिकरण में सेटिंग सिस्टम इतना मजबूत है कि शासन के आदेश भी बेअसर हो जाते हैं। जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही पद पर तैनाती से न केवल प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित होती है, बल्कि पारदर्शिता पर भी असर पड़ता है। इसी कारण ट्रांसफर नीति को प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है, ताकि किसी भी तरह की जड़ता और प्रभावशाली पकड़ को रोका जा सके।
शासन के आदेशों की अनदेखी कब तक?
इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शासन के आदेशों की खुलेआम अनदेखी आखिर कब तक होती रहेगी। यदि उच्च स्तर से जारी आदेशों को ही लागू नहीं किया जा रहा, तो फिर प्रशासनिक अनुशासन की बात कैसे की जा सकती है। प्राधिकरण के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं और अधिकारी आपस में सवाल उठा रहे हैं कि आखिर रिलीविंग में देरी के पीछे कौन जिम्मेदार है। फिलहाल पूरे प्रकरण पर औद्योगिक विकास विभाग और शासन की चुप्पी भी कई तरह की अटकलों को जन्म दे रही है। अब देखना यह होगा कि शासन इस मामले में कब सख्त रुख अपनाता है और ट्रांसफर आदेशों को जमीन पर उतारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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