नोएडा में निवेश का झांसा देकर लगाया तगड़ा चूना, इस बड़े साइबर फ्रॉड के बारे में जानकर हिल गए सभी!
- Shiv Kumar
- 29 Jan, 2026
नोएडा के सेक्टर-14 में रहने वाले एक व्यक्ति से साइबर ठगों ने शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर 82.52 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को शेयर मार्केट एक्सपर्ट बताते हुए व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए पीड़ित को जाल में फंसाया और करीब 18 दिन में अलग-अलग खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो ठगी का खुलासा हुआ। पीड़ित की शिकायत पर साइबर अपराध थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुआ ठगी का खेल
पीड़ित योगेंद्र गहतोड़ी ने पुलिस को बताया कि वह सेक्टर-14 में अपनी पत्नी किरण गहतोड़ी के साथ रहते हैं। 25 नवंबर को उनके व्हाट्सऐप पर एक मैसेज आया, जिसमें एक लिंक दिया गया था। लिंक खोलने पर वह एक व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ गए। इस ग्रुप का एडमिन प्रेम प्रकाश वर्मा नाम का व्यक्ति था, जिसने दावा किया कि वह शेयर बाजार पर एक खास किताब लिखने जा रहा है, जो आम आदमी के लिए बेहद फायदेमंद होगी। शुरुआत में ग्रुप में ऐसे शेयरों की जानकारी दी जाने लगी, जिनमें मुनाफे की संभावना बताई जाती थी। ग्रुप के अन्य सदस्य भी लगातार अपने कथित मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा कर रहे थे, जिससे पीड़ित का भरोसा धीरे-धीरे बढ़ता चला गया।
डिमैट खाता खुलवाकर कराया गया निवेश
करीब एक महीने तक ग्रुप की गतिविधियां देखने के बाद 22 दिसंबर को ग्रुप संचालक ने एक कंपनी में निवेश करने की सलाह दी। उसने दावा किया कि यह कंपनी सेबी में रजिस्टर्ड है और इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित है। इसी दौरान जालसाजों द्वारा भेजे गए लिंक से पीड़ित का डिमैट खाता खुलवाया गया। योगेंद्र का कहना है कि शुरुआत में उनकी पत्नी किरण ने निवेश करने का विरोध किया था, लेकिन ग्रुप में दिख रहे मुनाफे और भरोसेमंद दावों के चलते कुछ दिनों बाद वह भी सहमत हो गईं। इसके बाद पीड़ित ने बताए गए खातों में पैसे डालने शुरू कर दिए।
18 दिन में ट्रांसफर किए 82.52 लाख रुपये
30 दिसंबर को ग्रुप के सभी सदस्यों को एक नए व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया गया। इसके बाद 17 जनवरी तक पीड़ित ने जालसाजों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 82 लाख 52 हजार 923 रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह रकम करीब 18 बार में जमा कराई गई। जब 17 जनवरी को पीड़ित ने अपने डिमैट खाते से पैसे निकालने की कोशिश की, तो वह असफल रहा। जालसाजों से संपर्क करने पर बताया गया कि टैक्स विभाग से अनुमति न मिलने के कारण रकम नहीं निकाली जा सकती। बाद में जब पीड़ित ने ग्रुप के अन्य सदस्यों से संपर्क किया तो सभी नंबर फर्जी निकले। इसके बाद पीड़ित ने साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






