नोएडा में नहीं बनेगा मेट्रोपोलिटन कॉर्पोरेशन, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की तरह काम करेगी अथॉरिटी, कैबिनेट बैठक में सीएम का फैसला
- Shiv Kumar
- 30 Jan, 2026
लखनऊ/नोएडा। राज्य सरकार ने फिलहाल नोएडा में मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन बनाने के प्रस्ताव को टाल दिया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई। कैबिनेट की बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के तर्कों को स्वीकार करते हुए यह तय किया गया कि न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (नोएडा) पूर्व की तरह ही काम करती रहेगी और अभी मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन का गठन नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठा था मुद्दा
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष अनुज्ञा याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को नोएडा में मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन बनाने पर विचार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद यह मामला शासन स्तर पर चर्चा में आया। औद्योगिक विकास विभाग ने कैबिनेट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नोएडा की स्थापना ‘उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम’ के तहत की गई है। इस अधिनियम का मूल उद्देश्य औद्योगिक, आवासीय और वाणिज्यिक विकास को बढ़ावा देना है, ताकि प्रदेश में निवेश आकर्षित किया जा सके। विभाग का मानना है कि यदि नोएडा में मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन का गठन किया गया, तो इससे औद्योगिक ढांचे और निवेश व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर सरकार की चिंता
कैबिनेट बैठक में यह भी कहा गया कि नोएडा प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक और आईटी हब है, जहां देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने निवेश किया है। मौजूदा प्राधिकरण मॉडल निवेशकों को त्वरित फैसले और एकल व्यवस्था उपलब्ध कराता है। मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन बनने की स्थिति में प्रशासनिक ढांचा बदल जाएगा, जिससे फैसलों में देरी और निवेशकों की परेशानी बढ़ सकती है। इन्हीं कारणों से औद्योगिक विकास विभाग के प्रस्ताव के आधार पर नोएडा को मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन न बनाने का फैसला लिया गया।
लैंड बैंक खत्म होने और भविष्य की चुनौतियों पर बहस
हालांकि, इस फैसले के बीच नोएडा के भविष्य को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। नोएडा का लैंड बैंक अब लगभग समाप्ति की ओर है। तेजी से हो रहे शहरीकरण, बढ़ती आबादी और बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ते दबाव के चलते कई विशेषज्ञ मौजूदा प्राधिकरण मॉडल को भविष्य की जरूरतों के लिए अपर्याप्त मान रहे हैं। उनका कहना है कि वार्ड प्रतिनिधियों वाली मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन अधिक लोकतांत्रिक, जवाबदेह और नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवस्था प्रदान कर सकती है।
अन्य महानगरों का उदाहरण दिया गया
रिपोर्ट में मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों का हवाला देते हुए कहा गया है कि मेट्रोपॉलिटन शासन मॉडल से कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय बुनियादी सेवाओं में सुधार संभव हुआ है। स्थानीय चुनावों के जरिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ती है और प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होती है। बावजूद इसके, फिलहाल राज्य सरकार ने नोएडा के लिए मौजूदा व्यवस्था को ही जारी रखने का निर्णय लिया है।
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