नोएडा चाइल्ड PGI में दुर्लभ रोंगों पर सेमिनार, एक सैकड़ा डॉक्टर हुए शामिल, जेनेटिक रोगों पर दी गहन जानकारी
- Shiv Kumar
- 28 Feb, 2026
नोएडा के सेक्टर-30 स्थित बाल स्वास्थ्य स्नातकोत्तर संस्थान (PGICH) के चिकित्सा आनुवांशिकी विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय दुर्लभ रोग दिवस की पूर्व संध्या पर फाउंडेशन डे और वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बाल रोग अकादमी (AOP) नोएडा के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 100 से अधिक डॉक्टरों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य दुर्लभ रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बाल चिकित्सा में आनुवांशिक जांच व उपचार की नई दिशा पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने दुर्लभ बीमारियों के बढ़ते मामलों और समय पर पहचान की आवश्यकता पर जोर दिया।
दुर्लभ रोगों की पहचान और प्रबंधन पर गहन चर्चा
संगोष्ठी की शुरुआत डॉ. मयंक निलय ने आनुवांशिकी रोगों की मूलभूत जानकारी साझा करते हुए की। उन्होंने बताया कि दुर्लभ रोगों का समय पर निदान बच्चों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है। इसके बाद आए हुए अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. ए.के. सिंह (निदेशक, PGICH), प्रोफेसर डॉ. डी.के. सिंह (डीन, PGICH एवं अध्यक्ष, AOP नोएडा) और प्रोफेसर डॉ. मुकुल जैन (CMS, PGICH) ने भी अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में आनुवांशिक रोगों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, ऐसे में आधुनिक जांच तकनीकों और समयबद्ध उपचार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
विशेषज्ञों ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में रखे विचार
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सीमा कपूर (MAMC, नई दिल्ली) ने भारतीय संदर्भ में दुर्लभ रोगों की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण कई मामलों का देर से पता चलता है। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. रुचिरा एम. गुप्ता ने बाल दुर्लभ रोग प्रबंधन में सामूहिक प्रयासों और बहु-विषयक टीमवर्क की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और अभिभावकों के बीच समन्वय से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
जागरूकता और शोध को बढ़ावा देने की दिशा में पहल
इस अवसर पर मौजूद विशेषज्ञों ने नई तकनीकों और आधुनिक आनुवांशिक परीक्षण विधियों की जानकारी भी साझा की। कार्यक्रम में दुर्लभ रोगों की पहचान, जांच प्रक्रिया, उपचार विकल्प और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के वैज्ञानिक मंच चिकित्सकों को अद्यतन जानकारी देने के साथ-साथ मरीजों के बेहतर उपचार में सहायक साबित होते हैं। यह आयोजन दुर्लभ रोगों के प्रति समाज और चिकित्सा समुदाय में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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