नोएडा में बिना डिलीवरी ही लोगों के फोन पर पहुंच रहा डिलीवर्ड का मेसेज, एजेंसियों की ट्रांसपेरेंसी और क्रेडिबिलिटी पर उठे सवाल
- Shiv Kumar
- 14 Mar, 2026
नोएडा में इन दिनों गैस सिलेंडर की डिलीवरी को लेकर उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। शहर के कई इलाकों में लोग गैस सेंटरों पर लंबी-लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग कराई थी और मोबाइल पर बुकिंग कन्फर्म का मैसेज भी आया। कुछ समय बाद “आउट फॉर डिलीवरी” का मैसेज भी मिला, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। इससे गैस वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जब डिलीवरी ही नहीं हुई तो फिर सिस्टम में सिलेंडर डिलीवर कैसे दिखा दिया गया। इस स्थिति से उपभोक्ताओं में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही है।
OTP आए बिना ही दिख रही डिलीवरी
गैस डिलीवरी के दौरान आमतौर पर उपभोक्ता के मोबाइल पर एक ओटीपी आता है, जिसे बताए बिना डिलीवरी प्रक्रिया पूरी नहीं होती। लेकिन कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें न तो ओटीपी मिला और न ही उन्होंने किसी को ओटीपी बताया, इसके बावजूद उनके मोबाइल पर सिलेंडर डिलीवर होने का मैसेज आ गया। यह मामला सामने आने के बाद गैस वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। शहर के अलग-अलग सेक्टरों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं। कतार में खड़े लोगों का कहना है कि उन्होंने दो-तीन दिन पहले बुकिंग कराई थी और अब मजबूरी में गैस सेंटर पर आकर पूछताछ करनी पड़
रही है, लेकिन एजेंसियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा।
कई इलाकों से बढ़ती जा रही शिकायतें
यह समस्या किसी एक व्यक्ति या एक मोहल्ले तक सीमित नहीं है। नोएडा के कई गैस सेंटरों पर इसी तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। कई उपभोक्ताओं ने एजेंसी कार्यालयों में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक स्पष्ट समाधान नहीं मिल पाया है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और कई जगहों पर उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि अगर व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो समस्या और बढ़ सकती है।
सिलेंडर कहीं और खपाए जाने की आशंका
कतार में खड़े लोगों का आरोप है कि गैस की किल्लत के बीच कुछ जगहों पर सिस्टम का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि सिलेंडर कहीं और खपाए जा रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें उपभोक्ताओं के नाम पर डिलीवर दिखा दिया जाता है। लोगों का कहना है कि अगर ऐसा हो रहा है तो यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। वहीं कई लोगों का मानना है कि या तो सिस्टम में तकनीकी खामी है या फिर कहीं न कहीं लापरवाही और मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। उपभोक्ताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
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