नोएडा में पकड़ी गई 10 करोड़ की GST चोरी, मोबाइल एक्सपोर्ट करने नाम से चला रहे थे फर्म, गिरोह की तरह कर रहे थे काम

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नोएडा में जीएसटी विभाग ने मोबाइल फोन निर्यात के नाम पर करीब 10 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला पकड़ा है। चार फर्मों पर फर्जी व्यापार दिखाकर जीएसटी रिफंड लेने का आरोप है। विभाग ने जांच शुरू कर दी है और हवाला कनेक्शन की भी आशंका जताई है।

नोएडा में जीएसटी विभाग ने करीब 10 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का बड़ा मामला पकड़ा है। विभाग ने मोबाइल फोन के निर्यात के नाम पर फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट पास कर रिफंड लेने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। अपर आयुक्त राज्य कर संदीप भागिया के निर्देश पर ज्वाइंट कमिश्नर रेंज एके राय और रेंज बी के संजय कुशवाहा के नेतृत्व में विशेष अनुसंधान शाखा ने चार फर्मों की गहन जांच की। जांच में सामने आया कि इन फर्मों ने बिना वास्तविक व्यापार किए ही कागजों में लेन-देन दिखाकर जीएसटी रिफंड का दावा किया। विभाग की कार्रवाई के बाद पूरे मामले में टैक्स चोरी और फर्जी कारोबार का बड़ा नेटवर्क सामने आने की संभावना जताई जा रही है।


एक ही बैंक शाखा में मिले चारों फर्मों के खाते

जांच के दौरान विभाग ने कई दिनों तक रेकी और पोर्टल डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि चारों फर्म एक गिरोह की तरह काम कर रही थीं। तीन फर्मों के मालिक बिजनौर जिले के निवासी बताए गए हैं, जबकि एक फर्म का मालिक बलरामपुर का रहने वाला है। हैरानी की बात यह रही कि सभी फर्मों के बैंक खाते दिल्ली की एक ही शाखा में खुले हुए थे। इसके अलावा फर्मों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल किए गए रेंट एग्रीमेंट भी एक ही स्थान से स्टांप और नोटराइज कराए गए थे। जांच में किसी भी स्थान पर वास्तविक माल, लेखा-जोखा या व्यापारिक गतिविधि नहीं मिली।


फर्मों में बैठाए गए थे केवल कर्मचारी

जांच में यह भी सामने आया कि प्रत्येक फर्म में केवल एक युवक को बैठाया जाता था, जिसे रोज सुबह दुकान खोलकर शाम तक वहीं बैठने के निर्देश दिए जाते थे। उसे व्हाट्सऐप पर लोकेशन भेजने के लिए कहा जाता था, ताकि ऐसा लगे कि वहां वास्तविक व्यापार चल रहा है। लेकिन इन युवकों को व्यवसाय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। विभाग के अनुसार बीओडब्ल्यूईबी पोर्टल पर घोषित खातों में किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री का लेन-देन दर्ज नहीं मिला।


राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर

जांच में पता चला कि फर्मों के खातों में केवल जीएसटी रिफंड की राशि आती थी, जिसे बाद में अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस वजह से अधिकारियों को हवाला के जरिए पैसे के लेन-देन की आशंका भी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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