नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में ट्रांसफर-पोस्टिंग में मनमानी, तबादले के बाद भी जमे अधिकारी, लापरवाही पर शासन सख्त, तत्काल एक्शन के निर्देश
- Shiv Kumar
- 17 Mar, 2026
नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में ट्रांसफर-पोस्टिंग पॉलिसी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राधिकरण के कई अधिकारी शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं और मलाई खा रहे हैं। उन्हें हटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। इस तरह शासन के आदेशों की अवहेलना हो रही है। इस मामले में अब शासन ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल स्थानांतरण आदेश का पालन कराने के निर्देश दिए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है। ताजा मामला आराधना, प्रबंधक (प्रशासन/सामान्य), ग्रेटर नोएडा को लेकर शासन ने प्राधिकरण को कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इनके अलावा AGM शोभा कुशवाहा और AGM इंडस्ट्री प्रिया सिंह के ट्रांसफर को लेकर भी प्रक्रिया कई सालों से अटकी हुई है।
शासन के आदेश के बावजूद नहीं छोड़ी कुर्सी, तीन दिन का अल्टीमेटम
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तैनात प्रबंधक (प्रशासन/सामान्य) आराधना का स्थानांतरण जुलाई 2025 में यूपीसीडा कानपुर के लिए किया गया था। हालांकि उन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देकर आसपास ही तैनाती की मांग की, जिसे शासन ने खारिज कर दिया। अब उन्हें तीन दिन के भीतर हर हाल में नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने का अंतिम अवसर दिया गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि तय समय में आदेश का पालन न करने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
डेपुटेशन और ट्रांसफर सिस्टम पर उठे सवाल
नोएडा प्राधिकरण में डेपुटेशन और ट्रांसफर सिस्टम को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, AGM इंडस्ट्री प्रिया सिंह को 2019 में कानपुर से डेपुटेशन पर नोएडा भेजा गया था, जबकि उनका डेपुटेशन अक्टूबर 2022 में ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद बिना किसी नए शासनादेश के वह अब तक उसी पद पर बनी हुई हैं। इसको लेकर कई बार शासन को पत्र भी भेजे गए, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लंबे समय से जमे अधिकारियों पर भी उठी उंगली
इसी तरह AGM शोभा कुशवाहा को लेकर भी आरोप हैं कि वह करीब 15 साल से एक ही पद पर बनी हुई हैं, जबकि उनका भी स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका है। बावजूद इसके उन्हें अब तक रिलीव नहीं किया गया। इस पूरे प्रकरण ने प्राधिकरण की कार्यशैली, पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, कार्रवाई की मांग तेज
इस मामले के सामने आने के बाद अब प्रशासनिक सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि समय पर ट्रांसफर पॉलिसी का पालन नहीं होता, तो इससे व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। ऐसे में अब सभी की नजर शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा या नहीं।
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