फर्जी तरीके से ECHS कार्ड का इस्तेमाल कर इलाज कराने वाले गैंग को पुलिस ने दबोचा, चार आरोपी धरे गए, पूछताछ जारी
- Shiv Kumar
- 17 Mar, 2026
गौतमबुद्धनगर के थाना बिसरख क्षेत्र में पुलिस ने फर्जी तरीके से ECHS कार्ड का इस्तेमाल कर इलाज कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में चार आरोपियों—शिखा सिंह, यश सिंह, जितेंद्र यादव और दानिश खान—को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, व्हाट्सएप के जरिए इस्तेमाल किया गया फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड भी बरामद किया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी पहचान के आधार पर इलाज कराकर करीब 6.5 लाख रुपये का अवैध लाभ लिया। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में धोखाधड़ी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी पहचान से अस्पताल में भर्ती, मौत के बाद भी किया खेल
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वादी की पुत्री के नाम पर फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड का उपयोग करते हुए तनु नाम की युवती को अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन इसके बाद भी आरोपियों ने उसी फर्जी नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवा लिया। इस पूरे घटनाक्रम में अस्पताल और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को भी चकमा दिया गया। पूछताछ में सामने आया कि यह काम योजनाबद्ध तरीके से किया गया, ताकि इलाज का खर्च बचाया जा सके और सरकारी योजना का गलत फायदा उठाया जा सके।
गिरोह का नेटवर्क, दो साल से कर रहे थे ठगी
मुख्य आरोपी दानिश खान ने पूछताछ में बताया कि वह अपने साथी प्रदीप के साथ मिलकर पिछले करीब दो साल से इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा था। दोनों ऐसे लोगों को तलाशते थे, जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे, और उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराते थे। इसके बदले में मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले भी इसी तरह के मामले में जेल जा चुके हैं और बाहर आने के बाद फिर इस अवैध काम में जुट गए।
फरार आरोपी की तलाश जारी, कई धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। फरार आरोपी प्रदीप की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है और उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है। इस कार्रवाई को कमिश्नरेट पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे इस तरह के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
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