नोएडा स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े होम बायर्स को अभी करना होगा इंतजार, आपत्तियों के निस्तारण के बाद मिलेंगी स्वीकृतियां
- Shiv Kumar
- 19 Mar, 2026
नोएडा की स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े हजारों होमबायर्स को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद जगी थी कि काम तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। सेक्टर-150 के एससी-02 प्रोजेक्ट पर लगी रोक भले ही हट गई हो, लेकिन अभी भी कई अहम मंजूरियां अटकी हुई हैं। खासकर लेआउट प्लान से जुड़ी स्वीकृतियां लंबित होने की वजह से पूरा मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। प्राधिकरण ने इस बीच कुछ नई आपत्तियां भी उठाई हैं, जिससे खरीदारों की चिंता और बढ़ गई है। लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे लोगों को अब फिर से देरी का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट के निर्देश के बाद भी क्यों अटकी प्रक्रिया
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण को आखिरी मौका देते हुए साफ कहा कि पहले दिए गए आदेशों का हर हाल में पालन किया जाए। इसके बाद प्राधिकरण ने भरोसा दिलाया कि इस मामले को आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। वहां सभी आपत्तियों पर चर्चा कर उनका निस्तारण किया जाएगा और फिर आगे की मंजूरियां दी जाएंगी। हालांकि, बायर्स का कहना है कि इस तरह के आश्वासन पहले भी मिल चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार बेहद धीमी है। उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन फिलहाल ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है।
अन्य सेक्टरों में भी लटके प्रोजेक्ट, बढ़ी चिंता
मामला सिर्फ सेक्टर-150 तक सीमित नहीं है। सेक्टर-152 में प्रस्तावित स्टेडियम प्रोजेक्ट भी अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इसकी वजह जमीन से जुड़ी प्रक्रियाओं का लंबित होना बताया जा रहा है, हालांकि प्राधिकरण ने अधिग्रहण जैसी किसी समस्या से इनकार किया है। वहीं, सेक्टर-78 और 79 में भी कथित अतिक्रमण की वजह से विकास कार्य प्रभावित हो रहा है। इन सब कारणों से स्पोर्ट्स सिटी का पूरा प्लान धीमा पड़ गया है। बायर्स का कहना है कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी लगाई है और अब लगातार हो रही देरी से उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ती जा रही है।
प्राधिकरण का क्या कहना है
अधिकारियों का कहना है कि सभी कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और तय नीतियों के अनुसार ही उठाए जा रहे हैं। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आगामी बोर्ड बैठक में सभी पहलुओं पर चर्चा होगी। उनका कहना है कि आपत्तियों को दूर करने के बाद ही अंतिम मंजूरी दी जाएगी, ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।
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