नोएडा वालों के लिए खुशखबरी, शहर में चलेंगी 8 डबलडेकर बसें, बोटेनिकल गार्डन से परिचौक व ग्रेनो वेस्ट तक कर सकेंगे सफर, 50 फीडर बसों का भी होगा संचालन
- Shiv Kumar
- 19 Mar, 2026
नोएडा में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहर में आठ डबल डेकर बसें पहुंच चुकी हैं और इन्हें जल्द ही सड़कों पर उतारा जाएगा। इन बसों का संचालन यूपी रोडवेज करेगा, जिससे रोजाना सफर करने वाले लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि ये सभी बसें इलेक्ट्रिक (ईवी) होंगी, जिससे न सिर्फ सफर आसान होगा बल्कि प्रदूषण भी कम होगा। शुरुआती तौर पर इन बसों के लिए दो प्रमुख रूट तय किए गए हैं, जिन पर जल्द सेवा शुरू होने की संभावना है।
दो रूट पर चलेगी डबल डेकर बस, एक्सप्रेसवे से सीधा कनेक्शन
प्राधिकरण के मुताबिक, पहला रूट बोटेनिकल गार्डन से परिचौक तक होगा, जो एक्सप्रेसवे के जरिए जोड़ा जाएगा। वहीं दूसरा रूट बोटेनिकल गार्डन से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक मूर्ति तक प्रस्तावित है। इन रूट्स के शुरू होने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर ऑफिस जाने वाले और रोजाना यात्रा करने वाले लोगों का समय बचेगा। साथ ही ट्रैफिक का दबाव भी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ईवी बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन तैयार, इसी महीने शुरू हो सकती है सेवा
इन डबल डेकर बसों को चलाने के लिए जरूरी तैयारियां भी तेजी से की जा रही हैं। सभी बसें इलेक्ट्रिक होने की वजह से इनके लिए मोरना बस स्टैंड में चार्जिंग स्टेशन बनाया जा रहा है। फिलहाल ये बसें यूपी रोडवेज डिपो में खड़ी हैं और माना जा रहा है कि इसी महीने के भीतर इनका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इससे शहर में एक आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित होगी, जो आने वाले समय में और भी मजबूत होगी।
50 फीडर बसों की मांग, सेक्टर और ग्रेनो वेस्ट को मिलेगा कनेक्शन
इसके अलावा प्राधिकरण ने 50 फीडर बसों की भी मांग शासन से की है। इन बसों का इस्तेमाल नोएडा के इंटरनल सेक्टर और ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जोड़ने के लिए किया जाएगा। इसके लिए एक एसपीवी का गठन किया जाएगा, जिसमें प्राधिकरण के अधिकारी भी शामिल होंगे, जबकि संचालन यूपी रोडवेज के जरिए ही किया जाएगा। अगर ये योजना पूरी तरह लागू होती है, तो नोएडा में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है और लोगों को निजी वाहनों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी।
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