नोएडा में एमपी रोड पर प्रस्तावित एलिवेटेड का होगा रि-डिजाइन, DPR के बाद IIT से कराएंगे वेरिफाइड, 10 मिनट में पूरा होगा सफर

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नोएडा में एमपी-1 एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर नई डीपीआर तैयार की जाएगी। सेक्टर-57 से डीएनडी तक बनने वाली इस सड़क से ट्रैफिक जाम में राहत मिलेगी। रजनीगंधा चौक पर तकनीकी चुनौतियों के कारण डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है।

नोएडा में लंबे समय से प्रस्तावित एमपी-1 एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की दोबारा डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) और डिजाइन तैयार करने का फैसला लिया है। यह एलिवेटेड रोड सेक्टर-57 से डीएनडी तक बनाई जाएगी, जिससे शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। प्राधिकरण नई डीपीआर को आईआईटी भेजेगा, ताकि तकनीकी रूप से मजबूत और व्यवहारिक डिजाइन तैयार किया जा सके। पहले भी इसकी डीपीआर बनाई गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चनों के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई थी।


रजनीगंधा चौक बना सबसे बड़ी चुनौती

इस परियोजना में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती रजनीगंधा चौक पर सामने आ रही है। यहां पहले से अंडरपास और मेट्रो लाइन मौजूद है, जिससे एलिवेटेड रोड का डिजाइन जटिल हो गया है। प्राधिकरण इस बात पर विचार कर रहा है कि एलिवेटेड रोड को मेट्रो लाइन के ऊपर से निकाला जाए या इसे दो हिस्सों में बांटकर बनाया जाए। इसके लिए पहले फिजिबिलिटी स्टडी कराई जाएगी, जिसके आधार पर अंतिम डिजाइन तैयार होगा। अधिकारियों का कहना है कि बिना मजबूत तकनीकी समाधान के निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह की दिक्कत न आए और परियोजना टिकाऊ बनी रहे।


इन सेक्टरों को मिलेगा सीधा फायदा

इस एलिवेटेड रोड के बनने से नोएडा के कई अहम सेक्टरों को सीधा फायदा मिलेगा। सेक्टर-57, 58, 59, 65, मामूरा समेत आसपास के इलाकों का ट्रैफिक काफी स्मूद हो जाएगा। खासतौर पर दिल्ली से आने-जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी जहां इस मार्ग पर सफर में करीब 30 मिनट लगते हैं, वहीं एलिवेटेड रोड बनने के बाद यह समय घटकर करीब 10 मिनट रह जाएगा। प्राधिकरण के अनुसार, इस परियोजना पर लगभग 600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसका विवरण नई डीपीआर में शामिल किया जाएगा।


पुरानी योजना को अब मिलेगा नया रूप

इस परियोजना की नींव साल 2015-16 में रखी गई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया था। हालांकि, इसके बाद कई सालों तक यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब एक बार फिर इसे नए सिरे से शुरू करने की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि शहर में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह परियोजना बेहद जरूरी हो गई है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले समय में नोएडा के लोगों को जाम से बड़ी राहत मिल सकती है।

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