नोएडा के स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स को आज IIT से मिलेगा अप्रूवल, पहले फेज में खर्च होंगे 70 करोड़ रुपये, इनडोर-आउटडोर गेम्स की मिलेगी सुविधा
- Shiv Kumar
- 25 Mar, 2026
नोएडा के सेक्टर-123 में प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अब जल्द जमीन पर उतर सकता है। बुधवार को इसकी ड्राइंग और बजट को IIT Delhi से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। जैसे ही यह अप्रूवल मिलता है, नोएडा प्राधिकरण टेंडर प्रक्रिया शुरू कर देगा। शुरुआती चरण में इंडोर स्पोर्ट्स सुविधाओं पर फोकस रहेगा, ताकि खिलाड़ियों को जल्दी से सुविधाएं मिल सकें। प्राधिकरण इस प्रोजेक्ट को खुद तैयार करेगा या फिर पीपीपी मॉडल के जरिए विकसित करेगा, इस पर भी मंथन जारी है। अनुमान है कि एक महीने के भीतर टेंडर जारी कर निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी जाएगी।
पहले चरण में इंडोर गेम्स, खिलाड़ियों को मिलेगी बड़ी राहत
अधिकारियों के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली से स्वीकृति मिलने के बाद फाइल प्राधिकरण की कमेटी के पास जाएगी और वहां से हरी झंडी मिलते ही टेंडर जारी कर दिया जाएगा। पहले फेज में बैडमिंटन, टेबल टेनिस, कुश्ती जैसे इंडोर खेलों की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे खिलाड़ियों को तुरंत अभ्यास के लिए बेहतर जगह मिल सकेगी। नोएडा में फिलहाल सेक्टर-21ए स्टेडियम ही प्रमुख स्पोर्ट्स सेंटर है, लेकिन वहां भीड़ ज्यादा होने के कारण खिलाड़ियों को दिक्कत होती है। ऐसे में नया कॉम्प्लेक्स उभरते खिलाड़ियों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा पूरा स्पोर्ट्स हब
करीब 26.65 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यहां सिंथेटिक ट्रैक, जेवलिन थ्रो ग्राउंड, स्विमिंग पूल, फुटबॉल ग्राउंड और दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा मल्टीपर्पज हॉल, जिमनास्टिक एरिया, लॉन्ग जंप और हाई जंप जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। आउटडोर गेम्स के लिए क्रिकेट, वॉलीबॉल, कबड्डी, लॉन टेनिस और खो-खो की व्यवस्था होगी। यानी यह कॉम्प्लेक्स एक ऑल-इन-वन स्पोर्ट्स हब के रूप में तैयार किया जाएगा।
आसपास के सेक्टरों को मिलेगा सीधा फायदा
इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के बनने से सेक्टर-122, पर्थला, सेक्टर-119, सेक्टर-121, सर्फाबाद और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। खासकर युवा खिलाड़ियों को अब दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्राधिकरण का मानना है कि इससे न सिर्फ खेल को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा। निर्माण पूरा होने के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी किसी एजेंसी को दी जाएगी, जिससे सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन हो सके।
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