नोएडा सेक्टर-62 में बनेगा स्काईवॉक, एक साल तक रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन, प्राधिकरण ने ट्रैफिक विभाग को भेजा प्लान

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नोएडा सेक्टर-62 गोलचक्कर पर 26.34 करोड़ की लागत से स्काईवॉक बनेगा। निर्माण के चलते करीब एक साल तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। प्राधिकरण ने सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और साइन बोर्ड लगाने की योजना बनाई है।

नोएडा के सेक्टर-62 गोलचक्कर पर जल्द ही स्काईवॉक का निर्माण शुरू होने जा रहा है, जिससे पैदल यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के लिए नोएडा प्राधिकरण ने करीब 26.34 करोड़ रुपये का बजट तय किया है और टेंडर हासिल करने वाली कंपनी को वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिया गया है। प्राधिकरण के जीएम सिविल एसपी सिंह के अनुसार, निर्माण कार्य के पहले चरण में ही ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाएगा, जो लगभग एक साल तक जारी रह सकता है। इसके लिए विस्तृत योजना तैयार कर ट्रैफिक विभाग को भेज दी गई है, ताकि निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।


निर्माण के दौरान लागू होगा ट्रैफिक डायवर्जन प्लान

स्काईवॉक निर्माण के चलते सेक्टर-62 और आसपास के इलाकों में अस्थायी ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाएगा। योजना के तहत सेक्टर-62 से राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर जाने वाले मार्ग पर एक लेन बंद रखी जाएगी, जबकि दो लेन सामान्य रूप से चालू रहेंगी। इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्ग से सेक्टर-63 की ओर आने वाले मार्ग पर भी एक लेन बंद रहेगी और बाकी दो लेन यातायात के लिए खुली रहेंगी। गोलचक्कर की ओर जाने वाले मार्ग पर भी एक लेन बंद रहेगी और वाहनों का आवागमन एक लेन से ही संचालित किया जाएगा।


सुरक्षा के लिए होगी बैरिकेडिंग और संकेतक व्यवस्था

निर्माण कार्य के दौरान संबंधित क्षेत्र को चारों ओर से बैरिकेडिंग कर पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा। साथ ही, हर प्रमुख मोड़ और डायवर्जन पॉइंट पर स्पष्ट साइन बोर्ड लगाए जाएंगे, जिससे वाहन चालकों को रास्ते में होने वाले बदलाव की जानकारी मिलती रहे। प्राधिकरण का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य ट्रैफिक को व्यवस्थित रखना और किसी भी तरह की अव्यवस्था या दुर्घटना से बचाव करना है।


पैदल यात्रियों को मिलेगा बड़ा फायदा

स्काईवॉक बनने के बाद सेक्टर-62 गोलचक्कर पर पैदल यात्रियों को सड़क पार करने में आसानी होगी और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी। यह प्रोजेक्ट शहर के व्यस्त चौराहों पर सुरक्षित और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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