नोएडा जिला अस्पताल की घोर लापरवाही, इंसानों की जगह मंगवा ली जानवरों वाली सिरिंज, 60 हजार सिरिंज का दिया ऑर्डर
- Shiv Kumar
- 02 Apr, 2026
नोएडा के जिला अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रशासन ने इंसानों के बजाय पशुओं में इस्तेमाल होने वाली करीब 60,000 सिरिंज का ऑर्डर दे दिया। यह पूरी प्रक्रिया तीन स्तर की जांच के बाद भी पास हो गई, जिससे सिस्टम की बड़ी खामी उजागर हुई है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी चूक के बावजूद किसी अधिकारी की नजर इस पर नहीं गई और मामला तब सामने आया जब सप्लाई अस्पताल पहुंची।
तीन स्तर की जांच के बाद भी नहीं पकड़ी गई गलती
जानकारी के अनुसार, 25 दिसंबर 2025 को अस्पताल प्रशासन ने GeM Portal के जरिए सिरिंज का ऑर्डर दिया था। यह ऑर्डर फार्मासिस्ट, एसएमओ स्टोर और फिर सीएमएस स्तर तक जांच के लिए गया, लेकिन किसी ने भी यह नहीं देखा कि ऑर्डर में ‘वेटरनरी सिरिंज’ लिखा हुआ है। इससे साफ है कि पूरी प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। अगर यह गलती समय रहते नहीं पकड़ी जाती, तो मरीजों के इलाज में बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती थी।
सप्लाई आने पर खुला मामला, प्रशासन में मचा हड़कंप
जब सिरिंज की सप्लाई अस्पताल पहुंची और स्टोर में बॉक्स खोले गए, तब पैकेजिंग पर ‘पशु चिकित्सा उपयोग’ लिखा देखकर कर्मचारियों के होश उड़ गए। इसके बाद तुरंत उच्च अधिकारियों को जानकारी दी गई और पूरे मामले में हड़कंप मच गया। अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं, ऐसे में इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर मानी जा रही है।
अस्पताल प्रशासन ने बताई ‘मानवीय भूल’
इस मामले पर अस्पताल की सीएमएस डॉ. अजय राणा ने इसे ‘मानवीय भूल’ बताया है। उनका कहना है कि जैसे ही गलती का पता चला, ऑर्डर को तुरंत वापस कर दिया गया और न तो कोई बिल बनाया गया और न ही भुगतान किया गया। हालांकि, इस सफाई के बाद भी सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी गलती सिस्टम में कैसे हो गई और जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोएडा जैसे हाईटेक शहर के अस्पताल में इस तरह की लापरवाही यह दिखाती है कि सिस्टम में सुधार की कितनी जरूरत है। अगर समय रहते यह गलती पकड़ में नहीं आती, तो मरीजों की सेहत के साथ बड़ा जोखिम हो सकता था। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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